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Showing posts from June, 2020

जप प्रेरणा - कृष्ण का पवित्र नाम कृष्ण से अभिन्न है - Krishna's Holy Name is Non-different from Krishna - 21 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

कृष्ण का पवित्र नाम कृष्ण से अभिन्न  है Krishna's Holy Name is Non-different from Krishna जप प्रेरणा – 21 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu इस दुनिया में यह देखा गया है कि सुंदर नामों वाले लोगों में और उनके गुणों में कोई संबंध नहीं है, जैसे कि कोई व्यक्ति लक्ष्मीपति है लेकिन वह एक भिखारी है। अतः मायावादी लोग सभी गतिविधियों को पीड़ादायक मानते हुए मौन अवस्था में जाना चाहते हैं। क्योंकि वे कहते हैं कि इस दुनिया में गतिविधियाँ पीड़ा क्योंकि जीवों के साथ आदान प्रदान, और भौतिक प्रकृति के साथ संपर्क से पीड़ा होती है। तो सबसे अच्छी बात क्या है? सभी गतिविधि बंद करो, और वैरागी हो जाओ और मौन में रहो और बौद्ध कहते हैं कि अकेले मौन पर्याप्त नहीं है वैरागी हो जाना पर्याप्त नहीं है क्योंकि तुम अभी भी सचेत हो। फिर से, आप गतिविधि कर सकते हैं। अच्छा होगा कि शुन्यवाद द्वारा आध्यात्मिक आत्महत्या करके अपने अस्तित्व को समाप्त कर लें। तो, श्रील प्रभुपाद ने अपने तात्पर्यों में इन प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया और समझाया कि स्वस्थ नाम, स्वस्थ रूप, कृष...

जप प्रेरणा - चित्त की निचली प्रकृति को ध्यानपूर्वक जप करने का उपदेश दें। - Preach to the Lower Nature of the Mind to Chant Attentively- 19 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

चित्त की निचली प्रकृति को ध्यानपूर्वक जप करने का उपदेश दें। Preach to the Lower Nature of the Mind to Chant Attentively. जप प्रेरणा – 19 Jun 20 – Hindi Translation Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu हरे कृष्ण। मन के दो भाग जिनकी हम कल बात कर रहे थे एक संघर्षरत साधक भाग है और एक कृष्ण प्रतिनिधि है, गुरु परम्परा का प्रतिनिधि भाग है। आप देखेंगे कि मन के संघर्षरत साधक भाग सदैव सोचता है कि मैंने पर्याप्त किया है पवित्र नाम प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है। मुझे कोई आदान प्रदान नहीं मिल रहा है, ओह यह बहुत कठिन है। यह असंभव है। मैंने इसे देख लिया है। इस प्रकार की चीख मन के उस भाग से आती है। किन्तु कृष्ण का प्रतिनिधि भाग सदैव पवित्र नाम से प्राप्त असंख्य लाभों की सराहना करने में सक्षम होगा। आप देखेंगे, पवित्र नाम से दी गई शक्ति के बिना आप अच्छे चरित्र को बनाए रखने में सक्षम नहीं होते, और शुद्ध जीवनशैली जो हम अब जी रहे हैं, नहीं जी पाते। पवित्र नाम का जप किए बिना हमने कभी भी इतना आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त नहीं किया होता  दुनिया को सही दृष्टि से देखने की स्पष्टता नहीं प्राप्त कर...

जप प्रेरणा - हरे कृष्ण जप हृदय की शुद्धि के लिए एक प्रगतिशील प्रक्रिया है - Chanting Hare Krishna is a Progressive Process to Cleans the Heart - 18 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

हरे कृष्ण जप हृदय की शुद्धि के लिए एक प्रगतिशील प्रक्रिया है Chanting Hare Krishna is a Progressive Process to Cleans the Heart  जप प्रेरणा – 18 Jun 20 – Hindi Translation Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu हरे कृष्ण। जब हम दुनिया के लोगों को पवित्रशास्त्र के संदेश का उपदेश देते हैं, तो वे स्वयं को अपनी सीमाओं के कारण लोगों को बोलने के लिए अयोग्य अनुभव कर सकते हैं। लेकिन शास्त्र कहता है कि चेतना के दो भाग हैं, एक भाग गुरु और कृष्ण का प्रतिनिधि है और दूसरा भाग एक संघर्षशील साधक है। तो गुरु और कृष्ण के प्रतिनिधि को स्वयं के भीतर संघर्षरत साधक के भाग को प्रचार करना चाहिए। और धीरे-धीरे संघर्षरत साधक एक स्थिर साधक बन जाएगा और अंततः कई वर्षों के अभ्यास के बाद शुद्ध प्रतिनिधि बन जाएगा। तो इसलिए हमारे आचार्य लिखतें हैं यहार प्रसादे भाई, ये भव तोरिया यई, इस तरह से, भजहु रे मन श्री नंद नंदन, ये सभी गीत वास्तव में उच्च आत्म द्वारा हमारे निचले आत्म को उपदेश दे रहे हैं। उच्चतर स्वयं निचले स्वयं को उपदेश दे रहा है कि वह पवित्र और उन्नत हो जाए और कृष्ण के चरण कमलों में स्थिर भक्त बन जाए। अत...

जप प्रेरणा - कृष्ण प्रेम को जगाने के लिए पवित्र नाम साधक के लिए सबसे बड़ा उपहार है - Holy Name is the Greatest Gift for Sadhak to Awaken Krishna Prem - 17 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

कृष्ण प्रेम को जगाने के लिए पवित्र नाम साधक के लिए सबसे बड़ा उपहार है Holy Name is the Greatest Gift for Sadhak to Awaken Krishna Prem  जप प्रेरणा – 15 Jun 20 – Hindi Translation Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu हरे कृष्ण। श्रीमद्भागवतम् में यह उल्लेख है कि आध्यात्मिक गतिविधियों को लंबे समय तक करना होता है, और उनके द्वारा सर्वोच्च भगवान के लिए शुद्धि और जागृत भावनाओं का उत्पादन करना होता है। एक श्लोक है जो कहता है, श्रुतसम्भृतया चिरम्, कपिल अपने उपदेशों में कहते हैं श्रुतसम्भृतया चिरम्, का अर्थ है कि वैदिक साहित्य को लंबे समय तक सुनना चाहिए, वे कहते हैं। तो, क्या होता है जब कोई पवित्र नाम या पवित्र शास्त्र को लंबे समय तक सुनता है? लंबे समय तक सुनने से संस्कार पैदा होतें हैं। जैसे बच्चा लंबे समय तक मां के साथ रहता है, दिन में और रात में, बच्चा पूरे दिन मां के साथ रहता है। माँ द्वारा बच्चे को नहलाया और सजाया जाता है और कपड़े पहनाये जाते हैं। उनके बीच इस प्रकार के निरंतर संपर्क के कारण, भावनाएं विकसित होती हैं। इसी प्रकार, प्रभुपाद का कहना है कि भगवान के विग्रह रूप से लंबे समय...

जप प्रेरणा - भक्त के निरंतर और धैर्यपूर्ण प्रयासों की कृष्ण सराहना करते हैं - Krishna Appreciates Persistent, Constant and Patient Efforts of Devotee - 15 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

भक्त के निरंतर और धैर्यपूर्ण प्रयासों की कृष्ण सराहना करते हैं  Krishna Appreciates Persistent, Constant and Patient Efforts of Devotee  जप प्रेरणा – 15 Jun 20 – Hindi Translation Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu हरे कृष्ण। कृष्ण के लिए गोपीयों का आकर्षण, शीघ्रता, उत्सुकता, उनके समर्पण को श्रीमद्भागवतम् में बहुत सराहा जाता है क्योंकि वे केवल कृष्ण के चरण कमलों तक चलने के लिए अन्य सभी भौतिक आश्रयों को छोड़ने के लिए सज्ज थे। उसी तरह आप कृष्ण चेतना में एक नए भक्त को पाएंगे, जो अपने रोते चिल्लाते पिता और भाइयों, बहनों से दूर भाग जाता है व्यावहारिक रूप से अपना जीवन कृष्ण को समर्पित करने के लिए महान उत्सुकता दिखता है। उनके पास एक प्रकार की महान शक्ति और आग है जिसके साथ लड़का अपने सभी रिश्तेदारों को पीछे छोड़ सकता है, और कृष्ण के चरण कमलों में बहुत विश्वास के साथ वह अपना जीवन समर्पण करने के लिए दौड़ता है। यह सभी भौतिक आश्रयों से भागकर और कृष्ण के चरण कमलों में आने वाली गोपियों के समान है। किन्तु फिर वन में, हालांकि कृष्ण बांसुरी बजाते थे और उनसे बात करते थे, अंततः उन्हें रास न...

जप प्रेरणा - ध्यान न देना अन्य सभी अपराधों की जननी है। - Inattentiveness is the Mother of All Other Offences - 14 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

ध्यान न देना अन्य सभी अपराधों की जननी है। Inattentiveness is the Mother of All Other Offences जप प्रेरणा – 14 Jun 20 – Hindi Translation Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu हरे कृष्ण, अनर्थों के कारण जप में तीन बाधाएं औदासीन्य, विक्षेप और जड्य आती हैं। पवित्र नाम के प्रति उदासीन होना और पवित्र नाम की उपेक्षा करना या रजोगुण द्वारा संचालित विभिन्न विचारों से विचलित होना, या जड्य का अर्थ है पवित्र नाम के जप में सो जाना। तो, ये तीनों ध्यान रहित जप के मुख्य कारण हैं। जिसका अर्थ है रजोगुण तमोगुण की हमारी निम्न प्रकृति से अपराध हो सकते हैं। कैसे? उदाहरण के लिए, यदि भक्त अच्छी तरह से सोया नहीं है और फिर उसका मस्तिष्क गर्म है। फिर वह नींद की संतुष्टि की कमी के कारण दूसरे भक्त को अपमानित कर सकता है। तो पाप कैसे अपराध कर सकते हैं आप देख सकते हैं। असावधानी तमोगुण में होती है या व्यक्ति प्रमाद से प्रेरित होती है, जिसके कारण वह आकस्मिक निर्णय लेता है, जिससे अपराध भी होता है, विशेषतः वैष्णवों के बीच में। इसलिए, आप निष्ठा के चरण तक देखेंगे तदा रजस्तमोभावा: कामलोभादयश्च ये ।  चेत एतैरनाविद्धं ...

जप प्रेरणा - मन की बकबक की उपेक्षा करने के पूछने योग्य तीन शब्दों का प्रश्न - The Three Word Question to be Asked to Ignore the Mantle Chatter - 13 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

मन की बकबक की उपेक्षा करने के पूछने योग्य तीन शब्दों का प्रश्न  The Three Word Question to be Asked to Ignore the Mantle Chatter जप प्रेरणा – 13 Jun 20 – Hindi Translation Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu एक बहुत ही सरल तीन शब्दों का प्रश्न, यदि कोई समझदारी से पूछने में सक्षम है। वह छोटा सा प्रश्न एक बच्चा भी इस प्रश्न को याद रख सकता है। यदि कोई इसे याद करता है और प्रश्न पूछता है, तो इसके आधार पर व्यक्ति यह सोच सकता है कि किसके बारे में चिंतित होना चाहिए, किसके बारे में चिंतित नहीं होना चाहिए। जैसा कि मैंने आपसे कहा, जो लोग हमारे साथ एक तटस्थ संबंध में हैं, जो हमसे बहुत दूर हैं, यहाँ तक कि उनकी गतिविधियाँ भी हमें व्याकुल कर रही हैं। अतः, चाहे वे दूर हों, चाहे वे हमारे साथ बातचीत कर रहे हों, चाहे यह साथी हमारे दिमाग के अंदर हो। तो तीन शब्द का प्रश्न, सरल प्रश्न है, "क्या यह उपयोगी है?"। बस इतना ही पूछना है। क्या इस बारे में चिंता करना उपयोगी है? क्या यह कुछ फल देगा, क्या यह कुछ फल पैदा करेगा? यदि यह अभी कोई फल नहीं देने जा रहा है, तो अपने स्वयं के कार्य पर ध्यान दें। अ...

जप प्रेरणा - मन की बकवास की उपेक्षा करते हुए जप करें - Chant Ignoring the Mental Chatter of the Mind - 12 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

मन की बकवास की उपेक्षा करते हुए जप करें Chant Ignoring the Mental Chatter of the Mind जप प्रेरणा – 12 Jun 20 – Hindi Translation Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu हरे कृष्ण। हम जप के लिए यांत्रिक दृष्टिकोण का आश्रय क्यों लेते हैं? क्योंकि मन कई अन्य चिंताओं और आशंकाओं से ग्रस्त हो जाता है। आप मानसिक बकबक देखेंगे, जो हमारे आस-पास की दुनिया, हमारे चारों ओर के वातावरण में सब कुछ सही कर देने के हमारे प्रयास से आरम्भ होती है, यह एक अंत रहित घटना के समान है क्योंकि एक समस्या को सुलझाने के बाद भी दूसरी तीसरी चौथी पाँचवी समस्या आती रहती है। इस प्रकार, मन पुर्णतः विभिन्न चिंताओं से ग्रस्त हो जाता है और समाधान खोजता रहता है और पुरानी समस्याओं को सुलझाता है, और बुलबुले के समान नई समस्याओं को जन्म देता रहता है जो पानी के नीचे से पानी की सतह पर आते रहते हैं, जिससे, मन जप के समय विभिन्न विचारों और योजनाओं और विचारों और समाधानों से घिर जाता है। जिसके कारण मन पवित्र नाम से हट जाता है, और इन समस्याओं पर ध्यान देने लगता है, जो एक प्रपात के समान आते हैं, परेड में एक के बाद एक आने वाले सैनिकों के स...

जप प्रेरणा - जीव के लिए सबसे बड़ा अभिशाप - The Greatest Curse for Living Entity - 11 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

जीव के लिए सबसे बड़ा अभिशाप The Greatest Curse for Living Entity जप प्रेरणा – 11 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu हम बात कर रहे थे कि किस प्रकार से यांत्रिक जप या कुछ योगिक प्रक्रियाओं द्वारा पवित्र नाम पर अधिकार नहीं किया जा सकता है। और पवित्र नाम और  भगवान्, सूर्य के उदय के समान, केवल स्वेच्छा से अपनी कृपा से प्रकट होते है। सूर्य का उदय और अस्त होना किसी के हाथ में नहीं है। यह सूर्य का निर्णय है जब वो उगना चाहे। उसी प्रकार भगवान् का पवित्र नाम उनकी इच्छा के अनुसार स्वयं प्रकट होगा, और हम उन्हें यांत्रिक रूप से समझ नहीं पाएंगे। अब, भगवान हमारे ह्रदय में प्रकट होने के लिए, यह शास्त्रों के अध्ययन से भली प्रकार से जाना जाता है नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया । शक्य एवंविधो द्रष्टुं दृष्टवानसि मां यथा ॥ भ. गी. ११.५३ ॥  भक्त्य‍ा त्वनन्यया शक्य (भ. गी. ११.५३)   तो इस प्रकार के कई कथन हमें मिलते हैं, भक्त्या माम अभिजानाती  (भ. गी. १८.५५) । और भगवान उद्धव को भी बताते हैं। न साधयति मां योगो न साङ्ख्यं धर्म उद्धव । न स्वाध्...

जप प्रेरणा - त्वरित परिणामों की अपेक्षा के बिना, धैर्यपूर्वक जप करते रहें - Keep Chanting Patiently, Without Expectations of Quick Results - 10 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

त्वरित परिणामों की अपेक्षा के बिना, धैर्यपूर्वक जप करते रहें Keep Chanting Patiently, Without Expectations of Quick Results जप प्रेरणा – 10 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu जब आप एक बीज बोते हैं और उसे पानी देते हैं, तो पौधे और पेड़ रात भर में नहीं उग आता हैं। इसमें समय लगेगा और अंततः यह कई वर्षों में कई फूलों और फलों का उत्पादन करता रहेगा। उसी प्रकार जप की प्रक्रिया है, यह एक पारलौकिक प्रक्रिया है, जो केवल हमारे प्रयास पर निर्भर नहीं करती है, बल्कि यह भगवान् की कृपा पर निर्भर करती है। अतः, जो लोग वास्तव में बुद्धिमान हैं, उन्हें पता होगा कि पूरा जीवन कृष्ण के साथ प्रेमपूर्वक संबंधों को जगाने के विषय में है, और यह प्रेम संबंध सदैव के लिए है, शाश्वत है, यह आने वाले हर समय के लिए है। और क्योंकि यह सम्बन्ध सर्वोच्च भगवान के साथ है, यह एक बहुत ही गतिशील प्रकार का सम्बन्ध है। और भगवान भक्त की व्यक्तिगत प्रमाणिकता और व्यक्ति की प्रार्थनापूर्ण मनोदशा, व्यक्ति के अपराधमुक्त जप के आधार पर प्रकट होने के लिए सहमत हो भी सकते हैं या प्रकट होने के लिए...

जप प्रेरणा - आचार्यों का अनुसरण करते हुए सही भाव में जप करें - Chant with Right Consciousness Following in Footsteps of Acharyas - 9 Jun 20 – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

आचार्यों का अनुसरण करते हुए सही भाव में जप करें  Chant with Right Consciousness Following in Footsteps of Acharyas जप प्रेरणा – 9 Jun 20 – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu पवित्र नाम जपने के लिए व्यक्ति को सही दृष्टिकोण सीखना चाहिए। ऐसे भी लोग हैं जो कहते हैं, परिणाम की चिंता मत करो, तुम सिर्फ जप करते रहो, यहां तक कि असावधानी से भी। तुम वापस भगवद्धाम जाओगे। और फिर श्लोक बताते है जैसे साङ्केत्यं पारिहास्यं वा स्तोभं हेलनमेव वा । वैकुण्ठनामग्रहणमशेषाघहरं विदु: ॥ श्री. भा. ६.२.१४ ॥  ऐसे कई श्लोक हैं जो कहते हैं कि यदि कोई लापरवाही से नाम जपता है तो भी उसके लाभ मिलते हैं, यह सच है। पर व्यक्ति को पता होना चाहिए कि इस प्रकार के श्लोक वास्तव में नए लोगों के लिए उल्लिखित हैं और जो गलती से अपने जीवन में पवित्र नाम से टकराते हैं। किन्तु यदि कोई साधना भक्त बनने की इच्छा रखता है, तो उसे एक गंभीर जपकर्ता, चौकस जपकर्ता बनना होगा, जो उसके ह्रदय को शुद्ध करने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है। और कोई भी इस प्रकार के शास्त्र वाक्यों का उद्धरण नहीं दे सकता है और कह सकता...

जप प्रेरणा - दैनिक जप समय के सर्वोत्तम सदुपयोग का सुवर्ण अवसर है - Daily Chanting is a Golden Opportunity to Make Best Use of Time - 8 Jun 20 – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

दैनिक जप समय के सर्वोत्तम सदुपयोग का सुवर्ण अवसर है  Daily Chanting is a Golden Opportunity to Make Best Use of Time जप प्रेरणा – 8 Jun 20 – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu हरे कृष्ण। श्रीमद्भागवतम् में कहा गया है: आयुर्हरति वै पुंसामुद्यन्नस्तं च यन्नसौ । तस्यर्ते यत्क्षणो नीत उत्तमश्लोकवार्तया ॥ श्री. भा. 2.3.17 ॥  हर दिन, जब सूरज पूर्व में उगता है, तो वह इस दुनिया में रहने वाले सभी जीवों के आयु के एक हिस्से या जीवन की अवधि को हर लेता है और फिर शाम को अस्त करता है। कल फिर से सूर्य उदय होगा और सभी जीवों के शरीरों के जीवन की अवधि का थोड़ा और हिस्सा छीन लेगा और फिर से यह अस्त हो जाएगा। इस प्रकार, सूरज धीरे-धीरे, थोड़ा-थोड़ा करके, किन्तु निश्चित रूप से इस दुनिया में रहने वाले सभी जीवों के जीवन की अवधि को निगल रहा है। इसके अतिरिक्त, सभी जीव एक कृत्रिम शरीर में डाल दिए जाते हैं। प्रभुपाद कृत्रिम शरीर इस शब्द का उपयोग करतें हैं। प्रभुपाद का एक व्याख्यान है, जिसका शीर्षक है, एक कृत्रिम शरीर से दूसरे कृत्रिम शरीर में जाना। इसलिए, जीवों को उन शरीरों में र...

जप प्रेरणा - भौतिक स्वतंत्रता और आध्यात्मिक निर्भरता का अभ्यास कैसे करें - How to Practice Material Independence and Spiritual Dependence - 4 Jun 20 – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

भौतिक स्वतंत्रता और आध्यात्मिक निर्भरता का अभ्यास कैसे करें  How to Practice Material Independence and Spiritual Dependence जप प्रेरणा – 4 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - भौतिक दुनिया में, जिस सीमा तक हम अपने भौतिक कार्यक्रम को सरल रखते हैं जैसे साधारण कपड़े का उपयोग करना, एक बहुत ही साधारण जगह में रहना तो किसी व्यक्ति को भौतिक अधिग्रहण के लिए अधिक कठिन संघर्ष नहीं करना पड़ता है। कृष्ण की कृपा से प्रकृति की व्यवस्था से ये सभी वस्तुएं बहुत आसानी से किसी के लिए भी उपलब्ध हो जाती हैं। - व्यक्ति को सुरक्षा के विषय में अधिक चिंता नहीं करनी चाहिए कि भविष्य में क्या होगा, दुनिया इस तरह चल रही है, मेरा दिमाग ऐसे चल रहा है। इसके विषय में बहुत ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि समय के साथ स्थितियां बदल जाएंगी। किन्तु भौतिक रूप से हमें खुद को अधिक से अधिक स्वतंत्र बनाना चाहिए, जैसे कि थोड़ा उपवास करके हम यह विश्वास हासिल करते हैं कि वास्तव में हमें दिन में तीन बार खाने की आवश्यकता नहीं है और उसके बिना भी हम जीवित रह सकते। - हम भौत...

जप प्रेरणा - भौतिक रूप से स्वतंत्र और आध्यात्मिक रूप से निर्भर रहें - Be Materially Independent and Spiritually Dependent - 3 Jun 20 – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

भौतिक रूप से स्वतंत्र और आध्यात्मिक रूप से निर्भर रहें Be Materially Independent and Spiritually Dependent जप प्रेरणा – 3 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - यह सिखाया जाता है कि व्यक्ति को कैसे भौतिक रूप से स्वतंत्र होना चाहिए, किन्तु आध्यात्मिक रूप से निर्भर होना चाहिए। सत्यां क्षितौ किं कशिपो: प्रयासै- र्बाहौ स्वसिद्धे ह्युपबर्हणै: किम् । सत्यञ्जलौ किं पुरुधान्नपात्र्या दिग्वल्कलादौ सति किं दुकूलै: ॥ श्री. भा. २.२.४ ॥ चीराणि किं पथि न सन्ति दिशन्ति भिक्षां नैवाङ्‌घ्रिपा: परभृत: सरितोऽप्यशुष्यन् । रुद्धा गुहा: किमजितोऽवति नोपसन्नान् कस्माद् भजन्ति कवयो धनदुर्मदान्धान् ॥ श्री. भा. २.२.५ ॥ - पात्र खरीदने की क्या आवश्यकता है जब भगवान् ने आपको एक प्राकृतिक तकिया दिया है, जो आपका हाथ है जैसे आप अपने सिर को हाथ पे रख सकते हैं, यह एक तकिये की तरह है। तकिया खरीदने के लिए बाजार जाने की क्या आवश्यकता है? वास्तव में भूमि अपने आप में एक सपाट शैय्या के उपलब्ध है। एक और खाट एक शैय्या खरीदने की क्या आवश्यकता है? पानी की आपूर्ति के लिए नदियाँ हैं। गुफा...

जप प्रेरणा - एकादशी दिवस हमारे समर्पण की परीक्षा है - Ekadashi Day is a Test of Our Surrender - 2 Jun 20 – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

एकादशी दिवस हमारे समर्पण की परीक्षा है  Ekadashi Day is a Test of Our Surrender जप प्रेरणा – 2 Jun 20 – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu हरे कृष्ण। श्रील प्रभुपाद अपने एक व्याख्यान में कहते हैं कि जब भगवान कहते हैं, " सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज", तो कुछ लोग कहते हैं, यह सर्वोच्च भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण माँग कुछ अधिक ही उच्च है। वे कहते हैं, वे पहले स्वयं को प्रकट क्यों नहीं करते हैं, और फिर हम उनके प्रति समर्पण करेंगे, प्रभुपाद कहते हैं कि आप पहले समर्पण करो, फिर वे स्वयं को आपके सामने प्रकट करेंगे। फिर ये रस्साकसी कैसे समाप्त होगी, ऐसे बहुत से लोग हैं जो कृष्ण के समय में जी रहे थे जैसे दुर्योधन, दुशासन, शकुनि, कर्ण, जिन्होंने अपनी आँखों से कृष्ण को देखा था, किन्तु उन्होंने समर्पण नहीं किया। और केवल कृष्ण को ही नहीं देखा, उन्होंने उनका विश्वरूप भी देखा। उन्हें विभिन्न संत लोगों से कृष्ण की महानता के विषय में भी बताया और उपदेश दिए। और यह सब रहस्योद्घाटन जो कृष्ण ने उनके सामने दिखाया, उनमें से किसी ने भी उन्हें समर्पण करने के लिए प्रे...

जप प्रेरणा - कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं - Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can - 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं  Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can जप प्रेरणा – 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - यदि कोई अनन्य भक्ति का अभ्यास करता है, तो वह अपनी स्वयं की योजनाओं से भी अधिक सुख-सुविधा और सेवा पा सकता जब भगवान कृष्ण उसकी देखभाल करते हैं। वास्तव में हम स्वयं का उतना ध्यान नहीं रख सकते हैं जितना कृष्ण हमारा अच्छी तरह से ध्यान रख सकते हैं। जैसे एक बच्चा अपने लिए उतनी अच्छी सेवा नहीं कर सकता, जितनी माँ और पिता उसके लिए कर सकते हैं क्योंकि वे उसके सच्चे कल्याण को जानते हैं। और बच्चा नटखट और उद्दंड हो सकता है। कुछ सुख पाने के नाम पर वह कुछ गन्दी चीज खरीद सकता है और खा सकता है और बीमार हो सकता है। उसी प्रकार हम बद्ध आत्मा होने के कारण ये नहीं जानते कि हमारे लिए क्या अच्छा है लेकिन कृष्ण जानते हैं कि हमारे लिए सबसे उत्तम क्या है। - और एक बार जब आप इस विषय में आश्वस्त हो जाते हैं, तो आप अपना समय कृष्ण की सेवा में लगा सकते हैं, आप अपनी ऊर्जा और धन कृष्ण सेवा में व्यय कर सकते हैं, आप ...