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Showing posts from March, 2020

जप प्रेरणा - शुद्ध वैष्णव भक्त की सेवा करके अज्ञान को दूर करें - Eradicate Ignorance by Serving a Pure Vaishnava Devotee - Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

शुद्ध वैष्णव भक्त की सेवा करके अज्ञान को दूर करें - Eradicate Ignorance by Serving a Pure Vaishnava Devotee जप प्रेरणा - ३१ मार्च २० – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu जब शुकदेव गोस्वामी सभी नारकीय लोकों के विषय में बोल रहे थे, तो परीक्षित जैसे महान वैष्णव ने सभी पीड़ित आत्माओं पर अत्यधिक करुणा अनुभव की और उनसे पूछा कि इस संसार में रहने वाली आत्माएं बार-बार पाप कर्म क्यों करती हैं? और तब उन्हें अनेकों जन्मों तक अपने कर्मों का नर्क में फल भोगना पड़ता है। वे सर्वोच्च भगवान कृष्ण के समक्ष समर्पण करके अपने सभी पाप कर्मों को नष्ट क्यों नहीं कर सकते? और उन्होंने यह भी कहा कि भले ही लोग यज्ञ दान तप और कई प्रार्थना करते हैं किंतु वे बार-बार पापी गतिविधियों में वापस गिर जाते हैं। तो उस समय, शुकदेव गोस्वामी ने अपने शिष्य का परीक्षण करने के लिए कर्म, ज्ञान, योग और वे सभी मार्ग प्रस्तुत किए। और उन्होंने कहा, अगर कोई यज्ञ, दान, तप करता है और सभी पाप कर्मों को नष्ट किया जा सकता है। किंतु अगर कोई विमर्शनम करता है, जिसका अर्थ है कि पाप के बारे में ज्ञान की प्राप्त...

जप प्रेरणा - पापों का त्याग करें - Giveup Sinning - ३० मार्च २० - Hindi Transaltion of Japa Talk by HG Radheshyam Prabhu

जप प्रेरणा - पापों का त्याग करें - Giveup Sinning - ३० मार्च २० - Hindi Transaltion of Japa Talk by HG Radheshyam Prabhu हरे कृष्ण। इस दुनिया में, लाखों जीवात्माएं पैदा होती हैं; वे कुछ समय तक जीवित रहते हैं और फिर मर जाते हैं। जैसे पतंगे या मक्खियाँ, जो आग में गिरकर भुन जाती हैं। इसी तरह, पापी जीवात्माएं पापा कृत्यों में लिप्त रहती हैं और अपने ही कुकृत्यों की प्रतिक्रियाओं से बुरी तरह पीड़ित हैं। उनमें से कुछ अज्ञानी जीव हैं। अपनी मूर्खता के कारण, वे बार-बार एक ही प्रकार के पापों में लिप्त हो जाते हैं और अज्ञानी जानवरों की तरह पीड़ित होते हैं। अन्य लोग ज्ञानी हैं, लेकिन रजोगुण और तमोगुण के निचले गुणों के कारण ज्ञान रखने के बाद भी, वे बार-बार पाप में लिप्त होते हैं और फिर से भयानक परिणामों को आकर्षित करते हैं। आप शास्त्रों में देखेंगे कि यह उल्लेख किया गया है कि यदि कोई पवित्र कार्य कर रहा है, तो वह पापी गतिविधियों का प्रतिकार नहीं कर सकता है। उदाहरण के लिए, कहते हैं कि किसी ने एक अमीर आदमी से 20 लाख रुपये चुरा लिए हैं और वह कहता है कि मैं 10 लाख का आनंद स्वयं नहीं ले रहा, मैं इ...

जप प्रेरणा - आचार्यों से अपराध रहित जप कर पाने के लिए प्रार्थना करें - Pray for Acharya’s Blessings to Chant Inoffensively - Hindi Translation of Japa Talk by HG Radheshyam Prabhu - २९ मार्च २०

आचार्यों से अपराध रहित जप कर पाने के लिए प्रार्थना करें  जप प्रेरणा - Pray for Acharya’s Blessings to Chant Inoffensively - Hindi Translation of Japa Talk by HG Radheshyam Prabhu - २९ मार्च २० जब हम गाते हैं कृष्ण से तोमर, कृष्ण दीते पारो, तोमर शकती आछे  आमी तो कंगाल, कृष्ण कृष्ण बोली, धाई तव पाछे पाछे यह कहने का अर्थ है कि गुरु के पास कृष्ण हैं और वे कृष्ण को दूसरों को देते हैं और ऐसा करने में सक्षम हैं। अर्थ यह है कि गुरु शिष्य को कृष्ण का सबसे बड़ा उपहार उसे पवित्र नाम देकर देता है। क्योंकि पवित्र नाम के अंदर धाम है, और धाम में कृष्ण का रूप है और कृष्ण के रूप में कृष्ण के गुणों और उनके लीलाओं का सागर है। तो इस प्रकार से, पवित्र नाम में एक कैप्सूल के समान सब कुछ गुरु शिष्य पर कृपा करतें हैं। आज श्रीपाद रामानुजाचार्य का अविर्भाव है। और उन्होंने सभी लोगों को एक मंदिर के गोपुरम के शीर्ष पर चढ़कर पवित्र नाम दिया और उस पवित्र नाम का स्वतंत्र रूप से वितरण किया, जिसे उनके गुरु द्वारा उन्हें एक गुह्य नाम जैसे दिया गया था। वह पवित्र नाम के उपहार को जगत को देकर, स्वयं नरक...

जप प्रेरणा - विस्मृति और अनुचित परिचय का त्याग करना – Giving up Forgetfulness and Misidentification - २८ मार्च २०

विस्मृति और अनुचित परिचय का त्याग करना – Giving up Forgetfulness and Misidentification जप प्रेरणा – २८ मार्च २० – श्रीमान राधेश्याम प्रभु द्वारा जप प्रवचन हरे कृष्ण। हम भगवान् की विस्मृति और भौतिक शरीर से अनुचित परिचय को कैसे त्याग सकते हैं? उसके लिए व्यक्ति को भगवान् के अच्छे पुत्रों में गिना जाना होगा। आप गजेन्द्र की प्रार्थनाओं में पाते हैं कि यद्यपि वह भगवान् को भूल गया था, वह स्वयं को शरीर के साथ अनुचित रूप से परिचित कर रहा था और एक विशेष अवधि के लिए जंगल के राजा के रूप में हाथियों के समुदाय में आनंद ले रहा था, और उसे एक दर्दनाक स्थिति में डाल दिया गया था मगरमच्छ द्वारा पकड़े जाने पर। वह अपनी चेतना में आया और तब अपने अतीत के आध्यात्मिक जीवन अभ्यास  के कारण, तुरंत उसे याद आया और उसकी प्रार्थना हमें इस बात का अनुमान देती है कि कैसे एक व्यक्ति को सर्वोच्च भगवान के पास जाना चाहिए। उसका तर्क बहुत, बहुत शक्तिशाली है। वह कहता है, जहाँ भी आप बच्चों को पाते हैं तो  बच्चों के लिए माता-पिता होते ही हैं, कोई भी बच्चा हवा से पैदा नहीं होता है। इसी तरह, हम सभी चेतन जीव सचेत ...

जप प्रेरणा – गुरु की कृपा से भगवदप्राप्ति – Attain God by Guru’s Mercy - २६ मार्च २० – श्रीमान राधेश्याम प्रभु द्वारा जप प्रवचन

गुरु की कृपा से भगवदप्राप्ति जप प्रेरणा – गुरु की कृपा से भगवदप्राप्ति – Attain God by Guru’s Mercy - २६ मार्च २० – श्रीमान राधेश्याम प्रभु द्वारा जप प्रवचन भयं द्वितीयाभिनिवेशत: स्या-दीशादपेतस्य विपर्ययोऽस्मृति: । तन्माययातो बुध आभजेत्तं भक्त्यैकयेशं गुरुदेवतात्मा ॥ श्री. भा. ११.२.३७ ॥ श्रीमद्भागवतम् के इस श्लोक में एक बहुत बड़ा रहस्य उजागर हुआ है। जब एक जीव कृष्ण से विमुख होता है तो उसे दो बीमारियों से पीड़ित होता है, विस्मृति और अनुचित परिचय। विस्मृति किसकी? कृष्ण की विस्मृति। और किसका अनुचित परिचय? उनके शरीर और उनके शरीर से जुडी वस्तुओं के साथ अनुचित परिचय। जब आप कृष्ण की ओर सन्मुख होते हैं तो कृष्ण की प्रिय राधारानी, उनके प्रिय माता-पिता यशोदा नंद, उनके प्रिय मित्र श्रीदामा, सुदामा, मधुमंगल, उनकी प्रिय नदी, पवित्र यमुना नदी, उनकी प्रिय गाय और बछड़े, उनके प्रिय वृंदावन वासी, कृष्ण की प्रिय बांसुरी हमारे लिए सब कुछ महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम उनकी ओर सन्मुख होते हैं। लेकिन जब हम उनसे विमुख जाते हैं और उन्हें भूल जाते हैं, तो मैं और मेरा सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है। मैं कैस...

जप प्रेरणा - समर्पण का उचित भाव - The Right Attitude to Surremder - Hindi Translation of Japa Talk by HG Radheshyam Prabhu - २२ मार्च २०

जप प्रेरणा - २२ मार्च २० – श्रीमान राधेश्याम प्रभु द्वारा जप प्रवचन हरे कृष्ण। भक्ति सेवा के सभी विभिन्न अंगों को दिन प्रतिदिन, महीने दर महीने, वर्ष दर वर्ष क्यों करते करना चाहिए? विग्रहों का दर्शन करना, भगवान को प्रणाम करना, भगवान की परिक्रमा करना, चरणामृत लेना, भगवान को अर्पित किए गए पुष्पों की सुगंध को सूँघना, शास्त्रों का अध्ययन करना, श्रीमदभागवतम् सुनना, भक्तों का संग करना, प्रसादम ग्रहण करना। हम अपनी भक्ति सुकृति का वर्धन करने के लिए इन सभी गतिविधियों को बार-बार करते रहतें हैं। क्यों? ऐसी भक्ति सुकृति को बढ़ाते रहने से, जब हम कभी बहुत बड़े संकट में, या जीवन में बड़ी विपदा में होतें हैं, तो उस समय, यह संचित भक्ति सुकृति सर्वोत्तम प्रकार की बुद्धि का प्रदान करेगी। वह बुद्धि क्या है? यह बुद्धिमत्ता वह है जो हमें सर्वोच्च भगवान् के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित करती है। सामान्यतः अभक्त स्वयं के बुद्धिमान होने की कल्पना करते हैं। इसलिए, वे संकटों और भौतिक दुनिया की विपदाओं और परीक्षणों से बचने के लिए विभिन्न माध्यमों की खोज करते हैं। और उनके सभी आविष्कारों और कृतियों के...

जप प्रेरणा - संकीर्तन यज्ञ - २० मार्च २०

जप प्रेरणा - २० मार्च २० - संकीर्तन यज्ञ श्रीमद प्रभुपाद भगवद् गीता तीसरे अध्याय, 10 वें श्लोक में कहते हैं, “भगवान ने इस भौतिक संसार की रचना की, ताकि बद्ध आत्माओं को यज्ञ, यानि विष्णु की संतुष्टि के लिए यज्ञ करने के लिए सीखने में सक्षम बनाया जा सके। ताकि भौतिक दुनिया में रहते हुए, वे बहुत चैन से रह सकें, बिना किसी चिंता के, और वर्तमान भौतिक शरीर के समाप्त होने के बाद, वे परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सकें। यह बद्ध आत्मा के लिए संपूर्ण कार्यक्रम है।“ यज्ञ करने से बद्ध आत्माएं धीरे-धीरे कृष्ण भावना भावित हो जाती हैं और सभी प्रकार से ईश्वरीय बन जाती हैं। कलि युग में, संकीर्तन यज्ञ, भगवान के नामों का जप वैदिक शास्त्रों द्वारा सुझाया गया है, और इस युग में सभी पुरुषों के उद्धार के लिए भगवान चैतन्य द्वारा इस पारलौकिक प्रणाली की स्थापना की गई थी। संकीर्तन यज्ञ और कृष्ण भावना एक साथ उत्तम प्रकार से चलते हैं। भगवान कृष्ण अपने भक्तिमय रूप में भगवान चैतन्य के रूप में श्रीमद्भागवत ११.५.३२ में संकीर्तन यज्ञ के विशेष संदर्भ में इस प्रकार उल्लेखित हैं। कृष्णवर्णं त्विषाकृष्णं साङ्गोपा...

जप प्रेरणा – भूला हुआ सम्बन्ध - Lost Relationship - १७ मार्च २० (द लिविंग नेम, The Living Name)

भूला हुआ सम्बन्ध। जप प्रेरणा – १७ मार्च २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम से अंश। क्या आपके पास पक्के मित्र हैं। इससे मेरा आशय है कि आपके ह्रदय के निकट के लोग, जो अच्छे और बुरे समय में आपके साथ हैं, ऐसे लोग जिनके साथ आपका जीवन अत्यधिक बंधा हुआ है। क्या ये सम्बन्ध आपकी मृत्यु के बाद और उससे परे रहेंगे? केवल एक ही व्यक्ति है जो मृत्यु से परे हमारे साथ कसकर बंधा हुआ है। वे सदैव हमारे साथ रहे हैं, इस जीवन से भी पहले से। वह एक ऐसे मित्र हैं जो हमारे ह्रदय की भावों को जानतें हैं। और तो भी, हम किसी तरह उन्हें भूलने में सफल रहे हैं। हमने अपने सबसे महत्वपूर्ण सम्बन्ध को अचिंत्य रूप से भुला दिया। निसंदेह, अंततः यह सम्बन्ध कभी अंत नहीं हो सकता है। हम केवल अपनी इसकी चेतना खो देते हैं। हम हमेशा कृष्ण का एक अंश हैं क्योंकि हम आत्मा हैं, और आत्मा भगवान का हिस्सा है। लेकिन हमें उस एक सम्बन्ध का पूर्णतः लाभ लेने के लिए अपनी विस्मृति से जागना होगा। दूसरे विश्व युद्ध में, पोलैंड और रोमानिया जैसे देशों के परिवार के सदस्य बिछड़ गये थे। युद्ध के वर्षों बाद, उन्होंने फिर से...

जप प्रेरणा – आपका उद्देश्य कृष्ण को संतुष्ट करना है - Your Business is to Satisfy Krishna - १६ मार्च २० (द लिविंग नेम, The Living Name)

आपका उद्देश्य कृष्ण को संतुष्ट करना है। जप प्रेरणा – १६ मार्च २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम से अंश। श्रील प्रभुपाद निर्देश देते हैं जो कि कीर्तन गाने के विषय में मार्गदर्शन करतें हैं "आपका उद्देश्य भीड़ को संतुष्ट करना नहीं है, आपका उद्देश्य कृष्ण को संतुष्ट करना है और फिर भीड़ स्वतः ही संतुष्ट हो जाएगी। हम भीड़ को प्रसन्न नहीं करने जा रहे हैं; हम उन्हें कृष्ण देने जा रहे हैं। इसलिए, आपको बहुत सावधान रहना चाहिए कि क्या आप कृष्ण को सही तरीके से वितरित कर रहे हैं, और फिर वे संतुष्ट होंगे। कृष्ण को संतुष्ट करना ही आपका एकमात्र उद्देश्य होना चाहिए। " कीर्तन मुख्य रूप से संगीत की लय के बारे में नहीं है, मधुर ताल, करताल, आकर्षक वाणी या धुन बजाने के विषय में नहीं है। भगवान् वास्तव में हमारे संगीत के प्रति आकर्षित नहीं है। आध्यात्मिक दुनिया में उनके पास गोपियाँ हैं, जो हमारी क्षमताओं से बहुत दूर विशेषज्ञ संगीतकार हैं। वे 33,000 रागों द्वारा सेवित हैं। और कृष्ण स्वयं पूरे दिन एक ऐसे शैली में बांसुरी बजाते हैं, जो ह्रदय को परिवर्तित कर देता है यहां...

जप प्रेरणा – परम पूज्य गुरु प्रसाद स्वामी महाराज द्वारा जप प्रवचन - १४ मार्च २०

जप प्रेरणा – १४ मार्च २० - परम पूज्य गुरु प्रसाद स्वामी महाराज द्वारा जप प्रवचन हरे कृष्ण। तो, जप में सबसे महत्वपूर्ण बात ध्यान केंद्रित रहना है। जैसे अभी मंगल आरोतिक में, हमने दोहराया था कि व्यक्ति को सचेत होना चाहिए। तो मैं पंचतत्व मंत्र के लिए एक धुन गा रहा था और बाकी सब लोग एक दूसरी धुन गा रहे थे। और मैं वही धुन गा रहा था जो प्रभुपाद गाते थे। आजकल इस्कॉन में गौड़ीय मठ की धुन को गाना अधिक लोकप्रिय है। किंतु फिर भी, लेकिन मैं यह कहना चाहता था क्योंकि हम, हमारे जप की गुणवत्ता हमारे कीर्तन की गुणवत्ता पर निर्भर करती हैं और इसके विपरीत। कभी-कभी हमें कीर्तन में बहुत उत्साह होता है लेकिन जप में इतना उत्साह नहीं होता। वास्तव में  इन दोनों को एक ही स्तर पर होना चाहिए, और कीर्तन में, सुनने में बहुत सावधान रहना होगा कि कीर्तन की धुन क्या है। अन्यथा, हमारे पास अपने शरीर को स्वचालित पध्यती में रखने की प्रवृत्ति है, और फिर मन वह कर सकता है जो भी और कुछ वह चाहता है। जैसे हम सोच रहे हैं, अब अगले डेढ़ घंटे, दो घंटे, मैं यहाँ बैठा रहूँगा और मेरा मुँह हरे कृष्ण कह रहा होगा, तो मेरे मन, मैं क...

जप प्रेरणा – मंत्र के अर्थ पर ध्यान करना - Meditating on the Meaning of the Mantra - १३ मार्च २० (द लिविंग नेम, The Living Name)

मंत्र के अर्थ पर ध्यान करना। जप प्रेरणा – १३ मार्च २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम से अंश। हरि भक्ति विलास में, श्रील सनातन गोस्वामी हमें मंत्रार्थ चिंतनम का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, अर्थात हमें मंत्र के अर्थ पर ध्यान देना चाहिए। तभी मंत्र की पूरी शक्ति मुक्त की जाती है। यदि हम ध्यान नहीं देतें हैं और अर्थ के विषय में नहीं जानते हैं, तो हम ध्यानरहित रहते हैं। श्री चैतन्य चरितामृत, मध्य लीला 22.33 से एक श्लोक में, हम रहस्य सीखते हैं। “उचित आंतरिक उन्मुखीकरण मन में मंत्र के अर्थ को स्थापित करता है। कृपया मुझे अपनी सेवा में लगायें। ” इससे सम्बन्ध ज्ञान की स्थापना होती है और इस प्रकार हम समझते हैं कि हमारा कृष्ण के साथ एक सम्बन्ध है। पवित्र नाम जपने की पूरी अवधारणा भगवान् की उपस्थिति को आकर्षित करने के लिए है, उसका महिमा मंडन करके। हम उन्हें स्नेह के साथ बुलाते हैं, क्योंकि उनके पास सुंदरता, शक्ति, दया, ज्ञान के सभी सर्वोत्तम गुण हैं, और वे सर्वोत्तम प्रकार के लीलाएं करने के लिए अधिक रूप में सक्षम है और क्योंकि हमें वास्तव में उनकी आवश्यक...

जप प्रेरणा – एक सम्बन्ध में एक साथ बंधे हुए - Bound together in a relationship. - ७ मार्च २० (द लिविंग नेम, The Living Name)

एक सम्बन्ध में एक साथ बंधे हुए (शेष भाग)। जप प्रेरणा – ७ मार्च २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम से अंश। भौतिक जीवन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम यह भूल जाते हैं कि हमारी अभी अस्थायी रूप से जो मान्यता है, हमारी उससे पूरी तरह से अलग पहचान है। माया के भ्रमजाल में फंसते ही हमारी असली पहचान ढक जाती है। जब हम स्वयं को खो देते हैं, तो सब कुछ खो जाता है। किसी भी योग प्रणाली, विशेष रूप से भक्ति योग का उद्देश्य, विलग हो चुकी आत्मा को पुनः भगवान् से जोड़ना है। एक प्रसिद्ध सादृश्य में, इसकी उपमा है चिंगारी का पुनः आग में लौटना जहां वह फिर से चमक और नृत्य कर सकती है। श्रील प्रभुपाद का वर्णन है कि हम भौतिक दुनिया में माया से कैसे बंधे हैं। वे कहते हैं, "यह एक तथ्य है कि प्रत्येक जीवात्मा सदा कृष्ण का सेवक है। यह तथ्य माया के प्रभाव के कारण भुला दिया जाता है, जो व्यक्ति को भौतिक सुख में विश्वास करने के लिए प्रेरित करता है। माया से भ्रमित होने के कारण, व्यक्ति सोचता है कि भौतिक सुख ही केवल वांछनीय वस्तु है। यह भौतिक चेतना बद्ध आत्मा की गर्दन के चारों ओर एक ...

जप प्रेरणा – एक सम्बन्ध में एक साथ बंधे हुए - Bound together in a relationship. - ६ मार्च २० (द लिविंग नेम, The Living Name)

एक सम्बन्ध में एक साथ बंधे हुए। Bound together in a relationship. जप प्रेरणा – ६ मार्च २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम से अंश। योजन के बाद जो अगला अभ्यास मेरे विचार में सबसे महत्वपूर्ण तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, वो है सम्बन्ध की भावना के साथ जप करना। यदि आप यह करना सीखते हैं, तो आपके जप में व्यापक सुधार होगा। संस्कृत शब्द संबंध, संबंध को इंगित करता है। लेकिन इसका शाब्दिक अर्थ है एक साथ बंधे हुए होना। सम का अर्थ है एक साथ और बंध का अर्थ है बंधना। संबंध वह समझ है जो आपको कृष्ण से बांधती है। यह पवित्र नाम जप के लिए एक आंतरिक अभिविन्यास है जो आपको प्रभु की उपस्थिति में लाता है। संबंध सामान्य अर्थों से शुरू होता है कि मैं कृष्ण का अंश हूं। बाद में जब आप अपराधों से मुक्त पवित्र नाम का जप करते हैं, तो कृष्ण के साथ आपका संबंध स्पष्ट हो जाता है। अंतिम चरण में, पवित्र नाम से आपकी अद्वितीय आध्यात्मिक पहचान का पता चलता है, जिसमें आपका आध्यात्मिक शरीर, चरित्र लक्षण और आध्यात्मिक दुनिया में राधा और कृष्ण के लिए विशेष सेवा सम्मिलित हैं। इस संबंध में श्रील प्र...

जप प्रेरणा – आखिरी द्वार खुलता है - The last door opens - ४ मार्च २० (द लिविंग नेम, The Living Name)

आखिरी द्वार खुलता है।  (The Last Door Opens, The Living Name) जप प्रेरणा – ४ मार्च २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम से अंश। पवित्र नाम के साथ अपने आप को संरेखित करने के हमारे सभी प्रयासों के बाद, क्या पवित्र नाम स्वतः अपने आप को प्रकट करेगा? सरल उत्तर, रहस्योद्घाटन तब होता है जब कृष्ण अपनी महान दया से अनायास निर्णय लेते हैं। हमें इसके लिए वैसे ही इंतजार करना होगा जैसे हम भगवान रंगनाथ के मंदिर के अंतिम द्वार की अंदर से खुलने की प्रतीक्षा करते हैं। वैकुंठ के द्वार भारी तेज भालों से संरक्षित हैं, जिन्होंने भौतिक दुनिया के कई योगियों को वापस कर दिया है। आध्यात्मिक दुनिया में अपना रास्ता बनाने में कोई भी अनिमंत्रित व्यक्ति सफल नहीं हुआ है। इसी तरह, हम भगवान को स्वयं को प्रकट करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। पवित्र नाम, राधा और कृष्ण खुद को प्रकट करेंगे, कब और कैसे वे चुनते हैं। ऐसी कोई तकनीक या कौशल नहीं है जिसे हम सीख कर कृष्ण को हमारे ह्रदय में प्रकट कर लें। हम हमारी शक्ति में जितना कर सकते हैं कि दरवाजे को धक्का दे सकते हैं, लेकिन यह निस्संदेह अंदर स...