Skip to main content

जप प्रेरणा - कृष्ण प्रेम को जगाने के लिए पवित्र नाम साधक के लिए सबसे बड़ा उपहार है - Holy Name is the Greatest Gift for Sadhak to Awaken Krishna Prem - 17 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu


कृष्ण प्रेम को जगाने के लिए पवित्र नाम साधक के लिए सबसे बड़ा उपहार है
Holy Name is the Greatest Gift for Sadhak to Awaken Krishna Prem 

जप प्रेरणा – 15 Jun 20 – Hindi Translation Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu


हरे कृष्ण।

श्रीमद्भागवतम् में यह उल्लेख है कि आध्यात्मिक गतिविधियों को लंबे समय तक करना होता है, और उनके द्वारा सर्वोच्च भगवान के लिए शुद्धि और जागृत भावनाओं का उत्पादन करना होता है। एक श्लोक है जो कहता है, श्रुतसम्भृतया चिरम्, कपिल अपने उपदेशों में कहते हैं श्रुतसम्भृतया चिरम्, का अर्थ है कि वैदिक साहित्य को लंबे समय तक सुनना चाहिए, वे कहते हैं। तो, क्या होता है जब कोई पवित्र नाम या पवित्र शास्त्र को लंबे समय तक सुनता है? लंबे समय तक सुनने से संस्कार पैदा होतें हैं।

जैसे बच्चा लंबे समय तक मां के साथ रहता है, दिन में और रात में, बच्चा पूरे दिन मां के साथ रहता है। माँ द्वारा बच्चे को नहलाया और सजाया जाता है और कपड़े पहनाये जाते हैं। उनके बीच इस प्रकार के निरंतर संपर्क के कारण, भावनाएं विकसित होती हैं। इसी प्रकार, प्रभुपाद का कहना है कि भगवान के विग्रह रूप से लंबे समय तक संपर्क करना जैसे सजाने, ड्रेसिंग, आभूषण, और भोग, भगवान को शयन कराना आदि। यदि इन सभी को बहुत श्रद्धा और प्रमाणिकता से और सम्मान और समय की पाबंदी और सफाई के साथ किया जाता है, तो शीघ्र ही विग्रह की पूजा भक्त के हृदय में भावनाओं को जागृत करेगी।

तो इस तरह से विग्रह से लंबे समय तक संपर्क, श्रीमद्भागवत से लंबे समय तक संपर्क, पवित्र नाम से लंबे समय तक संपर्क, और ये सभी भावनाओं को जागृत करती हैं और आध्यात्मिक संस्कार पैदा करती हैं।

अतः श्री-कृष्ण-नामादि न भवेद् ग्राह्यं इन्द्रियैः । 
सेवोन्मुखे हि जिह्वादौ स्वयम् एव स्फुरत्य् अदः || श्री. चै. च. मध्य 17.136 ||


तो, यह श्लोक कहता है कि हमारी इंद्रियां कुंद और स्थूल और नीरस और मृत हैं, इसलिए इंद्रियों में कृष्ण को देखने की क्षमता नहीं है। किन्तु आध्यात्मिक गुरु के आदेश में विश्वास विकसित करने और गुरु परम्परा में आने वाले पवित्र नाम में विश्वास विकसित करने के बाद, जब कोई इसे महान पारलौकिक विश्वास के साथ स्वीकार करता है, और एक लंबे समय तक निवेश करने का अवसर लेता है, और फिर परिणाम यह होगा कि भगवान् के लिए आध्यात्मिक प्रभाव और भावनाएँ विकसित होंगी।

इसलिए, आचार्यों ने उपवास और भोज करने के लिए विशेष त्योहार के दिनों की रूपरेखा तैयार की है, माधव तिथि भक्ति जननी जतने पालन कोरी, इसका अर्थ है कि व्यक्ति को साधारण प्रयास नहीं, बल्कि एक विशेष प्रयास करना चाहिए, उत्सव के दिनों में कुछ अतिरिक्त भक्ति करने के लिए विशिष्ट ध्यान केंद्रित करने का प्रयास, क्योंकि इस प्रकार के दिन भक्ति जननी होते हैं। वे लंबे समय तक आध्यात्मिक प्रदर्शन से भक्त के ह्रदय में भक्ति उत्पन्न करते हैं।

और एकादशी के दिनों को भक्ति जननी दिनों में ही गिना जाता है, जब हम अधिक से अधिक मालाओं का जप करते हैं, अपना समय लेते हैं, अपनी ऊर्जा को विशेष ध्यान देते हुए, भविष्य के लिए अपनी अन्य प्राथमिकताओं को एक तरफ रख देते हैं। यह वास्तव में उन साधकों के लिए एक बड़ा लाभ होगा जो वास्तव में भगवान के साथ जुड़ने और समय के साथ उनके साथ एक बहुत ढृढ़ संबंध विकसित करने के विषय में गंभीर हैं।
तो पवित्र नाम का जप एक साधक के लिए सर्वोत्तम उपहार है, जिसे अच्छी तरह से प्रयोग किया जा सकता है, और लंबे समय तक अभ्यास के द्वारा उस प्रकार की जाग्रति के लिए उपयोग किया जा सकता है।

हरिनाम प्रभु की जय !!!

==========================================
Whatsapp Goup Join Link (हरैर नामैव केवलम् 4 - HNK) - 

Comments

Popular posts from this blog

जप प्रेरणा - कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं - Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can - 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं  Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can जप प्रेरणा – 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - यदि कोई अनन्य भक्ति का अभ्यास करता है, तो वह अपनी स्वयं की योजनाओं से भी अधिक सुख-सुविधा और सेवा पा सकता जब भगवान कृष्ण उसकी देखभाल करते हैं। वास्तव में हम स्वयं का उतना ध्यान नहीं रख सकते हैं जितना कृष्ण हमारा अच्छी तरह से ध्यान रख सकते हैं। जैसे एक बच्चा अपने लिए उतनी अच्छी सेवा नहीं कर सकता, जितनी माँ और पिता उसके लिए कर सकते हैं क्योंकि वे उसके सच्चे कल्याण को जानते हैं। और बच्चा नटखट और उद्दंड हो सकता है। कुछ सुख पाने के नाम पर वह कुछ गन्दी चीज खरीद सकता है और खा सकता है और बीमार हो सकता है। उसी प्रकार हम बद्ध आत्मा होने के कारण ये नहीं जानते कि हमारे लिए क्या अच्छा है लेकिन कृष्ण जानते हैं कि हमारे लिए सबसे उत्तम क्या है। - और एक बार जब आप इस विषय में आश्वस्त हो जाते हैं, तो आप अपना समय कृष्ण की सेवा में लगा सकते हैं, आप अपनी ऊर्जा और धन कृष्ण सेवा में व्यय कर सकते हैं, आप ...

जप प्रेरणा – पवित्र नाम सभी व्याधियों को ठीक करता है - १७ फरवरी २०

जप प्रेरणा – १७ फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य से अंश। पवित्र नाम सभी व्याधियों को ठीक करता है। (श्रील गौर गोविंद स्वामी महाराज का एक लेख) यदि कोई अपने कान खोलता है और गौरांग महाप्रभु की मधुर लीला को प्रवेश करने की अनुमति देता है, तो उसका हृदय सभी भौतिक संदूषणों से मुक्त हो जाएगा। हृदय शुद्ध हो जाएगा। आप हृदय को और कैसे शुद्ध कर सकते हैं? क्या कोई चिकित्सा वैज्ञानिक है जो जानता है कि ऐसा कैसे करना है? चिकित्सा वैज्ञानिक आपके आंत्र को साफ कर सकते हैं, लेकिन वह आपके ह्रदय को साफ नहीं कर सकते हैं। प्रार्थना में नरोत्तम दास ठाकुर पध्यती देते हैं - चैतन्य महाप्रभु की मधुर लीलाएँ सुनें - गौरान्गेर मधुरा-लीला, जार करने प्रवेसिला, ह्रदय निर्मला भेलो तार - तब हृदय निर्मल हो जाता है। निम्नलिखित श्लोकों में, हम सीखते हैं कि जप से न केवल हृदय रोग ठीक होता है, बल्कि शारीरिक रोग भी ठीक होते हैं अच्युतानंद गोविन्द नामोच्चारण भिशितः नश्यन्ति सकला रोगः सत्यम सत्यम वदामी अहम्  (ब्रहन-नारदीय पुराण से) मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि यह सच है। अच्युता, आनंद और...

जप प्रेरणा - श्रद्धा का अर्थ है रुचि, विश्वास और सम्मान - Shraddha Means Interest, Faith and Respect - 24 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

श्रद्धा का अर्थ है रुचि, विश्वास और सम्मान  Shraddha Means Interest, Faith and Respect जप प्रेरणा – 24 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - श्रील प्रभुपाद ने श्रद्धा शब्द का तीन अलग-अलग अर्थों में अनुवाद किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा का अर्थ है रुचि, श्रद्धा का अर्थ है विश्वास, श्रद्धा का अर्थ है सम्मान। - तो यदि किसी को पवित्र नाम पर श्रद्धा है, तो उसे जप में रुचि होगी, उसे पवित्र नामों की शक्ति के प्रति सम्मान होगा। - और यदि किसी को विश्वास या रुचि या सम्मान नहीं है, तो ऐसे लोग भी हैं जो पवित्र नामों की आलोचना करते हैं कि ये शक्तिहीन है, जो कि वास्तव में उनके अपने दोषों के कारण है। अतः वे पवित्र नाम में दोष ढूंढते हैं और चले जाते हैं और दूषित ही रहते हैं। - किन्तु जो पवित्र नाम में विश्वास और सम्मान रखते हैं, उन्हें पवित्र नाम में रुचि होगी, और वे पवित्र नाम को अपने हृदयों में प्रकट होने देंगे और उनके हृदयों में अशुद्धियों को शुद्ध करेंगे। हरिनाम प्रभु की जय !!! ================================================= हरे कृष्ण , इस्कॉन पुण...