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जप प्रेरणा - त्वरित परिणामों की अपेक्षा के बिना, धैर्यपूर्वक जप करते रहें - Keep Chanting Patiently, Without Expectations of Quick Results - 10 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu


त्वरित परिणामों की अपेक्षा के बिना, धैर्यपूर्वक जप करते रहें
Keep Chanting Patiently, Without Expectations of Quick Results

जप प्रेरणा – 10 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu



जब आप एक बीज बोते हैं और उसे पानी देते हैं, तो पौधे और पेड़ रात भर में नहीं उग आता हैं। इसमें समय लगेगा और अंततः यह कई वर्षों में कई फूलों और फलों का उत्पादन करता रहेगा। उसी प्रकार जप की प्रक्रिया है, यह एक पारलौकिक प्रक्रिया है, जो केवल हमारे प्रयास पर निर्भर नहीं करती है, बल्कि यह भगवान् की कृपा पर निर्भर करती है।

अतः, जो लोग वास्तव में बुद्धिमान हैं, उन्हें पता होगा कि पूरा जीवन कृष्ण के साथ प्रेमपूर्वक संबंधों को जगाने के विषय में है, और यह प्रेम संबंध सदैव के लिए है, शाश्वत है, यह आने वाले हर समय के लिए है। और क्योंकि यह सम्बन्ध सर्वोच्च भगवान के साथ है, यह एक बहुत ही गतिशील प्रकार का सम्बन्ध है। और भगवान भक्त की व्यक्तिगत प्रमाणिकता और व्यक्ति की प्रार्थनापूर्ण मनोदशा, व्यक्ति के अपराधमुक्त जप के आधार पर प्रकट होने के लिए सहमत हो भी सकते हैं या प्रकट होने के लिए सहमत नहीं भी हो सकते हैं। और शास्त्र असंख्य लीलाओं से भरे हुए हैं, कैसे भगवान अलग-अलग प्रकार से अलग-अलग भक्तों से आदान प्रदान करते हैं।

इसलिए जीव के जीवन का सारांश भगवान के साथ उसका संबंध है, जिसे किसी को शीघ्र अति शीघ्र समाप्त करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। वास्तव में हमें शीघ्र अति शीघ्र भौतिक जीवन समाप्त करना चाहिए। अतः एक जगह प्रभुपाद का कहना है कि जीव के इस भौतिक शरीर के क्रमिक पकना, उन्हें इस तरह से मृत्यु तक ले जाता है, इस तरह भगवान कृष्ण कहते हैं, मृत्यु: सर्वहरश्चाहम। यह भी भगवान की एक लीला है जो जीव की समाप्त करने की मानसिकता के साथ खेलना है। भगवान् कहते हैं कि तुम मेरे कार्यक्रम को समाप्त करना चाहते हो, मैं तुम्हारे कार्यक्रम को समाप्त कर दूंगा। यदि आप वास्तव में बुद्धिमान हैं तो आप इसे समझेंगे, हम यह बता रहे हैं कि कार्यक्रम किसका है? कृष्ण का कार्यक्रम, इसलिए भगवान् हमारे कार्यक्रम को समाप्त कर देते हैं। तो, भगवान् कहते हैं, आप इस प्रकार के एक उद्दंड जीव हैं, आप आने वाले हर समय के लिए भौतिक दुनिया का आनंद लेना चाहते हैं और आप मेरे कार्यक्रम को समाप्त करना चाहते हैं। और मैं आपको वृद्धावस्था, बीमारी और मृत्यु देकर आपके भौतिक जीवन को समाप्त कर दूंगा। प्रभुपाद का कहना है कि यह भी भौतिक दुनिया में भगवान की लीला है। इसे माया लीला कहा जाता है। भगवान अपनी लीला माया के माध्यम से करते हैं, माया की एजेंसी के माध्यम से उन बद्ध आत्माओं के लिए जो भगवान् के कार्यक्रम को समाप्त कर देना चाहते हैं।

इसलिए जो लोग पवित्र नाम का जप कर रहे हैं उन्हें सदैव एक साहसिक कार्य करने की तरह उत्सुक होना चाहिए। आप जानते हैं कि भगवान की योजना क्या है, जैसा भी वे मेरे जीवन को निर्देशित करता है मैं उसके अनुसार स्वयं को ढालने के लिए सज्ज हूं। यदि वे प्रकट होना चाहता है, तो स्वयं को प्रकट कर दें यदि वे प्रकट नहीं होना चाहते हैं तो मैं उनके पवित्र नाम को जप करके ही प्रसन्न रह लूँगा। मुझे उनके मंदिर में होने का अवसर मिलने की प्रसन्नता है। मुझे प्रसन्नता है कि मुझे अपने शरीर और अपनी इंद्रियों से सेवा करने का अवसर मिल रहा है। और मैं उनके भक्तों के साथ रहने, और उनके द्वारा दिए गए शास्त्र का अध्ययन करने में आनंदित हूं। और मैं इससे पूरी तरह संतुष्ट हूं, और मुझे उनसे कोई अपेक्षा नहीं है। मैं कैसे अपेक्षा कर सकता हूं? मैं ऐसा महान पापी और दुष्ट हूं और करोड़ों जीवनों से मैंने मेरा जीवन व्यर्थ किया है। अतः, यह पवित्र नाम के समीप जाने का सही तरीका है और हमें परिणाम के विषय में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। परिणाम भगवान के हाथ में है, और वे वही करेगें जो हमारे लिए उपयुक्त है।

हरिनाम प्रभु की जय !!!

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