जप प्रेरणा - आचार्यों से अपराध रहित जप कर पाने के लिए प्रार्थना करें - Pray for Acharya’s Blessings to Chant Inoffensively - Hindi Translation of Japa Talk by HG Radheshyam Prabhu - २९ मार्च २०
आचार्यों से अपराध रहित जप कर पाने के लिए प्रार्थना करें
जप प्रेरणा - Pray for Acharya’s Blessings to Chant Inoffensively - Hindi Translation of Japa Talk by HG Radheshyam Prabhu - २९ मार्च २०
जब हम गाते हैं
कृष्ण से तोमर, कृष्ण दीते पारो,तोमर शकती आछे आमी तो कंगाल, कृष्ण कृष्ण बोली,धाई तव पाछे पाछे
यह कहने का अर्थ है कि गुरु के पास कृष्ण हैं और वे कृष्ण को दूसरों को देते हैं और ऐसा करने में सक्षम हैं। अर्थ यह है कि गुरु शिष्य को कृष्ण का सबसे बड़ा उपहार उसे पवित्र नाम देकर देता है। क्योंकि पवित्र नाम के अंदर धाम है, और धाम में कृष्ण का रूप है और कृष्ण के रूप में कृष्ण के गुणों और उनके लीलाओं का सागर है। तो इस प्रकार से, पवित्र नाम में एक कैप्सूल के समान सब कुछ गुरु शिष्य पर कृपा करतें हैं।
आज श्रीपाद रामानुजाचार्य का अविर्भाव है। और उन्होंने सभी लोगों को एक मंदिर के गोपुरम के शीर्ष पर चढ़कर पवित्र नाम दिया और उस पवित्र नाम का स्वतंत्र रूप से वितरण किया, जिसे उनके गुरु द्वारा उन्हें एक गुह्य नाम जैसे दिया गया था। वह पवित्र नाम के उपहार को जगत को देकर, स्वयं नरक में जाने के लिए प्रस्तुत थे। उन्होंने कहा, लाख लोगों को वैकुंठ में जाने दें और अनंत काल तक भगवान की सेवा करके प्रसन्न रहनें दें, यदि पवित्र नाम का रहस्य सबको बता कर मुझ एक व्यक्ति को नरक में जाना पड़े तो कोई बात नहीं। यही उनका भाव था।
तो वैष्णव आचार्य, उनके हृदय पीड़ित आत्माओं के प्रति दया से भरे होतें हैं, जो भगवान् के गौरवशाली पवित्र नाम को वितरित करने के रूप में सामने आता है। और पवित्र नाम का उच्चारण करके, जीवात्मा संसार सेबाहर जाने का अत्यधिक आसान मार्ग खोज लेती है। और साथ ही, सर्वोच्च भगवान् की सुंदरता, मिठास, महानता और महिमा तक पहुँच पातीं हैं। और वे आने वाले पूर्ण भविष्य के लिए इसमें अति प्रसन्न रहतें हैं।
तो, आज जैसे महान आचार्यों का आविर्भाव दिवस हमारे लिए उनके चरण कमलों में प्रार्थना करने और उनके आशीर्वाद के लिए याचना करने का एक बड़ा वरदान है। और हम पवित्र नाम के जप कर पाने के लिए शक्ति मांग सकते हैं, क्योंकि उन्होंने हमें उपहार दिया है, लेकिन हम इस उपहार के मूल्य को पहचानने में असमर्थ हैं। और हम इस उपहार का पूरी क्षमता तक उपयोग करने में असमर्थ हैं और उचित दृष्टिकोण के साथ उचित भाव के साथ जप करके इसके लाभों को प्राप्त नहीं कर पाते हैं।
तो हम श्रीपाद रामानुजाचार्य जैसे आचार्यों से प्रार्थना कर सकते हैं कि कृपया हमें बुद्धि दें, हमें शक्ति प्रदान करें जिससे हम पवित्र नाम का अपराधरहित जप कर सकें और उसके पूर्ण लाभों को प्राप्त कर सकें और इस तरह कृष्ण को अनुभव कर सकें, उन्हें आमने सामने देखते हुए और उनकी शाश्वत सेवा में प्रवेश करें।
हरिनाम प्रभु की जय!
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हरे कृष्ण,
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