भूला हुआ सम्बन्ध।
जप प्रेरणा – १७ मार्च २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम से अंश।
क्या आपके पास पक्के मित्र हैं। इससे मेरा आशय है कि आपके ह्रदय के निकट के लोग, जो अच्छे और बुरे समय में आपके साथ हैं, ऐसे लोग जिनके साथ आपका जीवन अत्यधिक बंधा हुआ है। क्या ये सम्बन्ध आपकी मृत्यु के बाद और उससे परे रहेंगे?केवल एक ही व्यक्ति है जो मृत्यु से परे हमारे साथ कसकर बंधा हुआ है। वे सदैव हमारे साथ रहे हैं, इस जीवन से भी पहले से। वह एक ऐसे मित्र हैं जो हमारे ह्रदय की भावों को जानतें हैं। और तो भी, हम किसी तरह उन्हें भूलने में सफल रहे हैं। हमने अपने सबसे महत्वपूर्ण सम्बन्ध को अचिंत्य रूप से भुला दिया। निसंदेह, अंततः यह सम्बन्ध कभी अंत नहीं हो सकता है। हम केवल अपनी इसकी चेतना खो देते हैं। हम हमेशा कृष्ण का एक अंश हैं क्योंकि हम आत्मा हैं, और आत्मा भगवान का हिस्सा है। लेकिन हमें उस एक सम्बन्ध का पूर्णतः लाभ लेने के लिए अपनी विस्मृति से जागना होगा।
दूसरे विश्व युद्ध में, पोलैंड और रोमानिया जैसे देशों के परिवार के सदस्य बिछड़ गये थे। युद्ध के वर्षों बाद, उन्होंने फिर से एक दूसरे को ढूँढा। उस भावुक दृश्य की कल्पना करें जब एक बेटा अपने बूढ़े माता-पिता से पुनः मिला होगा। उसे कैसे अनुभव हुआ होगा? उनमें से कुछ लोग शिशु थे, जब वे अपने परिवारों से अलग हो गए थे। लेकिन तो भी, उन्हें वयस्कों के रूप में मिलने पर एक गहरा बंधन अनुभव हुआ। जैसे ही वे उन संबंधों में सक्रिय हुए, एक-दूसरे से बात करने लगे, एक परिवार के रूप में भोजन कर रहे थे और काम कर रहे थे, उनका स्वाभाविक सम्बन्ध फलना फूलना आरम्भ हो गया। जिस तरह इन निष्क्रिय संबंधों को तुरंत पुनर्जीवित किया गया था, कृष्ण के साथ हमारे सम्बन्ध को भी तत्क्षण पुनः सक्रिय किया जा सकता है, जैसे ही हम उनके सन्मुख होते हैं।
उदाहरण के लिए, जब हम तीर्थ यात्रा पर जाते हैं, जैसे कि वृंदावन, राधा और कृष्ण का घर, तो प्रेम की पारलौकिक भावनाएँ वृंदावन या मायापुर में उनके घर जाकर जागृत हो उठती हैं, बाद वाला श्री चैतन्य महाप्रभु का घर है। कोई भी जप या अन्य भक्ति प्रथाओं में संलग्न हो सकता है, और विशेष रूप से अनुभव कर सकता है कि कृष्ण यहां उपस्थित हैं, और मेरा उनके साथ पर्याप्त संबंध हैं। इसके विषय में आपको किसी को सिखाने की आवश्यकता नहीं है। यह स्वाभाविक रूप से होता है।
श्रील प्रभुपाद भक्ति रसामृत सिन्धु में लिखते हैं। मथुरा के 84 वर्ग मील जिले में स्थित स्थान यमुना के किनारे इतनी सुन्दरता से स्थित हैं कि जो कोई भी वहां जाता है वह इस भौतिक जगत में कभी नहीं लौटना चाहेगा।
श्री हरि नाम प्रभु की जय!
=================================================
हरे कृष्ण,
उपरोक्त परम पूज्य सचिनंदन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम के अंश का हिंदी में अनुवाद है। इस पुस्तक के विषय में और अधिक जानकारी के लिए कृपया ये लिंक पर जाइये
===============================
इस्कॉन पुणे से जप प्रवचन/पुस्तक अंश के रूप में दैनिक जप प्रेरणा (अंग्रेज़ी और हिंदी भाषा में अनुलेख और अनुवाद के साथ), साझा करने के लिए समूह।
समूह से जुड़ने के लिये इस लिंक को अपने मोबाइल में खोलें:
(यदि आप पहले से किसी भी "हरैर नामैव केवलम् - HNK" समूह से जुडें हैं तो कृपया इस लिंक को क्लिक न करें)
=================================================
HH Shachinandan Swami Maharaj, Hindi Japa Prerana, His Holiness Sachinandan Swami, The Living Name, The Living Name Book, Aligning the heart, Lost Relationship

Comments
Post a Comment