जप प्रेरणा - एक आनंदमय जीवन के लिए सही रूपरेखा - The Right Blueprint for a Blissful Life - 15 May 20 – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu
एक आनंदमय जीवन के लिए सही रूपरेखा
The Right Blueprint for a Blissful Life
जप प्रेरणा – 15 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu
• इस दुनिया के सभी जीवों के लिए भगवान के कार्यक्रम के विषय में प्रह्लाद पूरी तरह से अवगत थे।
• सभी को भगवान् को सेवा प्रदान करनी चाहिए और सभी को अन्य सब की सेवाओं का सम्मान और प्रशंसा करनी चाहिए और किसी को स्वयं की सेवा पर गर्व नहीं करना चाहिए, और सभी जीवों को प्रत्येक अन्य जीव को भगवान् का सेवक मानना चाहिए ना कि दूसरों से श्रेष्ठता और ईर्ष्या की भावना रखते हुए शत्रुता और झगड़े को बढ़ाना चाहिए।
• और किसी की सेवा प्रदान करने की क्षमता छोटी है या बड़ी, जो व्यक्ति भगवान् की कुछ भी सेवा करने का इच्छुक है, उसके गुणों की प्रशंसा करनी चाहिए।
• प्रह्लाद की रूपरेखा थी, कि पूरी दुनिया सर्वोच्च भगवान के चरण कमलों पर केंद्रित है, हर कोई भगवान की सेवा करने का प्रयास करता है, भगवान् को संतुष्ट करता है और भगवान को प्रसन्न करता है।
• इसलिए केंद्र में कृष्ण को रखना हम सभी के लिए आनंदमय जीवन की रूपरेखा है। और यह रूपरेखा स्वयं कृष्ण से निकलती है। क्योंकि भगवान सभी जीवों में सर्वोच्च हैं उन्हें सभी जीवों का प्रमुख कहा जाता है।
• इसलिए *पवित्र नाम के जप के लिए भी, और यहाँ आध्यात्मिक जीवन के लिए हमारे अभ्यास के लिए भी ये बातें उस रूपरेखा पर निर्भर करती हैं जिसे हम अपने ह्रदय में धारण करते हैं।* यदि हम वैकुंठ रुपरेखा का पालन करते हैं, जो कि पवित्रशास्त्र में स्वयं भगवान द्वारा दी गई रूपरेखा है, जो दुनिया को वसुधैव कुटुम्बकम बनाती है। तो यह एक सही रूपरेखा है।
• किसी के पास यह रुपरेखा नहीं है, या जिस सीमा तक, कोई सामान्य रूप से उस आध्यात्मिक जीवन के स्तर से दूर चला गया है तो विशेष रूप से पवित्र नाम का जप अत्यंत कठिन और पीड़ादायक और एक श्रमसाध्य प्रक्रिया बन सकती है। और तब कोई इसे एक महान यातना या तपस्या की तरह मानेगा, क्योंकि वह भगवान द्वारा दी गई मूल रूपरेखा से दूर भटक गया है।
• इसलिए यह सदैव ही अच्छा होगा कि प्रह्लाद से इस मनोभाव को सीखें और उन पर ध्यान लगाने और उनमें स्वयं को लीन करने का प्रयास करें, और पूरे दिन हमारे जीवन को इस प्रकार जियें कि जब पवित्र नाम का जप करें तो इस प्रकार के मनोभाव के साथ कर सकें और तब हम आत्मा के शुद्धिकरण और पोषण का अनुभव कर सकते हैं, और इस प्रकार आध्यात्मिक जीवन में उन्नति कर सकते हैं।
हरिनाम प्रभु की जय !!!
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हरे कृष्ण,
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