जप प्रेरणा - पवित्र नाम सबसे शक्तिशाली शस्त्र है - Holy Name is the Mightiest Weapon - 23 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu
पवित्र नाम सबसे शक्तिशाली शस्त्र है
Holy Name is the Mightiest Weapon
जप प्रेरणा – 23 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu
- अपनी भक्ति की सुंदर साधना के कारण प्रह्लाद महाराज ने अपने पिता के सामने ऐसी महान आध्यात्मिक शक्ति और पूर्ण स्वतंत्रता और निडरता का प्रदर्शन किया। उनके मित्र जो गुरुकुल में थे, वे उनसे प्रभावित हो गए।
- प्रहलाद के मित्रों में दो विशिष्ट योग्यताएं थीं गौरवेन, उन्होंने प्रहलाद का बहुत सम्मान किया। उनके उदात्त पारलौकिक गुणों को देखकर वे स्वाभाविक रूप से उनका अत्यधिक सम्मान करने लगे।
- उनका एक और गुण था कि वे अदुषित धियो थे, धीया का अर्थ होता है बुद्धिमत्ता, अदुषित धियो का अर्थ है कि वे अपने पाखंडी शिक्षक शंड अमर्क की शिक्षाओं से अधिक प्रदूषित नहीं थे। हालाँकि शिक्षण हो रहा था, किन्तु वे इससे प्रभावित नहीं थे उन्होंने उन शिक्षाओं को आत्मसात नहीं किया। उन्होंने सिर्फ हलके रूप में इसे सीखा और इसे छोड़ दिया। वे प्रह्लाद की भक्ति के अभ्यास से अधिक प्रभावित थे।
- तो ये दोनों योग्यताएं दया प्राप्त करने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण योग्यताएं हैं।
- किन्तु यदि किसी को उन उपदेशकों के लिए कोई सम्मान नहीं है जो धर्मग्रंथों से भगवान का संदेश दे रहे हैं, तो अशुद्धि साफ होने की कोई संभावना नहीं है।
- यदि किसी का ह्रदय बहुत ही सहज और भोला और सरल है, और जो छोटे, बराबर वाले और बड़े सब से सीखने के लिए तत्पर है, जो भी कृष्ण की दया, कृष्ण की अनुभूतियों को धारण करते है, ऐसे लोग जो गुरु से आने वाले संदेश के विषय में जानने और सम्मान के लिए तत्पर हैं। जो भगवान् से परंपरा के माध्यम से आने वाली दया के साधन, भक्तों, का सन्देश सीखने और सम्मान देने को तत्पर हैं, तो ऐसे साधकों के आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ने की अत्यधिक संभावना है।
- वास्तव में पवित्र नाम का जप इन सब को शुद्ध कर सकता है, यह दोनों अशुद्धियों को शुद्ध कर सकता है और हमें अदुषित धियो बना सकता है। यह हमें इस सीमा तक भी शुद्ध कर सकता है जैसे कि मृगारी जैसे अहंकारी और कठोर व्यक्ति भी संत नारद के लिए अत्यधिक सम्मान और आदर और प्रशंसा विकसित कर सकते हैं।
- इसलिए प्रभुपाद ने यह समझा कि केवल जप के द्वारा ही भौतिक अशुद्धियों को हटाया जा सकता है। अतः उन्होंने पवित्र नाम के जप पर अत्यधिक बल दिया, और जितनी अधिक अशुद्धि हो उतनी ही गंभीरता से जप करते हैं, और तब शुद्ध होने के पश्चात ही वे दया प्राप्त कर पायेंगे।
- अतः प्रभुपाद ने हरिनाम जप को अशुद्धियों को साफ करने के एकमात्र सबसे महान और सबसे शक्तिशाली शस्त्र के रूप में देखा जब वे पाश्च्यात्य जगत में गए।
हरिनाम प्रभु की जय !!!
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हरे कृष्ण,
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