जप प्रेरणा - सौभाग्यशाली आत्माएं भागवत धर्म को अपनाती हैं - Fortunate Souls Adopt Bhagvat Dharm - 26 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu
सौभाग्यशाली आत्माएं भागवत धर्म को अपनाती हैं - Fortunate Souls Adopt Bhagvat Dharm

जप प्रेरणा – 26 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu
- प्रह्लाद अपने मित्रों को बताते है कि सर्वोच्च भगवान के निकट आने के हजारों मार्ग हैं किन्तु उनमें से भगवान् के स्वयं के मुख से व्यक्तिगत रूप से बोला जाने वाला मार्ग शुद्ध भक्ति का मार्ग है। इस मार्ग से भगवान को बहुत सरलता से प्राप्त किया जा सकता है। वैधी भक्ति के मार्ग पर हमें 64 प्रक्रियाएँ दी गई हैं।
- प्रभुपाद कहते हैं, जीव और भगवान का संबंध चिरस्थायी और शाश्वत है, हालांकि यह अस्थायी रूप से ढका हुआ है। तो भक्ति की इन प्रक्रियाओं को अपनाने से भगवान् के प्रति प्राकृतिक आत्मीयता, स्नेह और लगाव जागृत होता है। और इस प्रकार के लगाव, स्नेह के जागृत न होने का कारण अपराध और पाप हैं। अपराध और पाप वे बाधाएं हैं, जो भगवान् के प्रति इस प्रकार के सहज भाव और भगवान और भगवान् की लीलाओं के संबंध में इन भावनाओं को जागृत नहीं होने देती हैं। तो, यह बात शास्त्र पूर्णतः स्पष्ट करते हैं।
- साधना भक्ति के मार्ग में, जिस सीमा तक हम अपराधों और पापों से बचते हैं, और हम भक्ति की इन गतिविधियों को करते हैं, जो प्रहलाद द्वारा ने बताई हैं जिनमे से विशेष रूप से पवित्र नाम का जप प्रमुख है, तब भगवान् के प्रति प्रेम, भगवान् के प्रति स्नेह स्वाभाविक रूप से जागृत होता है।
- हमें इस इस्कॉन आंदोलन में श्रील प्रभुपाद द्वारा वही समान प्रक्रिया दी गई है, जो प्रह्लाद अपने मित्रों को दे रहे हैं। भगवत धर्म की यही प्रक्रिया हमें बिना किसी संशोधन या भिन्नता के प्रदान की गई है, और वो सब अत्यंत भाग्यशाली हैं जो इसे अपनाते हैं। और कृष्ण के ऐसे स्वाभाविक प्रेम को जगाने के मार्ग में जो भी बाधाएं आ रही हैं, हमें बहुत लगन के साथ कड़ी मेहनत से उन बाधाओं को दूर करना चाहिए और इस आनंदमय चेतना का अनुभव करना चाहिए जो प्रह्लाद यहाँ समझा रहे हैं।
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