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जप प्रेरणा - प्रतिबद्ध भक्त अति शीघ्र कृष्ण को प्राप्त करते हैं - Committed Devotees Attain Krishna Very Soon - 31 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu


प्रतिबद्ध भक्त अति शीघ्र कृष्ण को प्राप्त करते हैं
Committed Devotees Attain Krishna Very Soon

जप प्रेरणा – 31 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu


- भक्ति में कुछ नियम होते हैं जैसे की निरंतर कृष्ण की अनन्य उपासना करना, बड़े निश्चय के साथ और बड़े स्नेह से भक्ति करना। कृष्ण इन नियमों को बताते हैं, वे कहते हैं कि, चूंकि मैं स्वयं को आपके लिए इतना प्रतिबद्ध कर रहा हूं, तो आपको भी इन प्रतिबद्धताओं को मुझे दिखाना होगा अन्यथा मैं एक अस्थिर संबंध के लिए प्रस्तुत नहीं हूं। ये उन्होंने गीता में बहुत स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है।

- तो, उन लोगों को जिन्हें अस्थिर मित्रता करने का स्वभाव है, अधिकतर परिणाम पर आधारित मित्रता है, ठीक है, यदि मैं इस साथी के साथ मित्रता करता हूं, तो मुझे यह मिलेगा या मुझे वह मिलेगा, वे वास्तव में भक्ति के लिए कोई प्रत्याशी ही नहीं हैं, वे धुल जायेंगे।

- किन्तु जो लोग अपना ह्रदय देते हुए, अपना जीवन देते हुए, अपना ध्यान देते हुए, अपना अवशोषण देते हुए और कृष्ण को उनका एकमात्र लक्ष्य बनाते हुए, कृष्ण के साथ एक गंभीर संबंध स्थापित करते हैं, वे लोग हैं जो अंततः कृष्ण के चरण कमलों की प्राप्ति करते हैं, अति शीघ्र।

- तो यह एक तथ्य है कि कृष्ण सबसे महान भगवान हैं, उदार भगवान, सुलभ और सुहृद भगवान, मधुर भगवान हैं। यह सब अति सत्य है। साथ ही, उन्होंने शुद्ध भक्ति के मार्ग में अपनी अपेक्षाओं को अति स्पष्ट किया है।

- अतः पवित्र नाम का जप वास्तव में हमारे ह्रदय को शुद्ध कर सकता है, और हमें उनके चरण कमलों को प्राप्त करने के स्तर तक उठा सकता है या हम जप कर सकते हैं पर कृष्ण द्वारा गीता के श्लोकों में अपेक्षित मूल्य का भुगतान न करने के कारण हम अटके रह सकते हैं, जिसके कारण हमारी अपनी सीमाओं और समर्पण करने की हमारी अनिच्छा के कारण, मार्ग में एक लोहे का परदा या बड़ा अवरोध हो सकता है।

- अतः, कृष्ण की विशाल प्रकृति के विषय में अध्ययन करते समय हमें उन प्रतिबद्धताओं और निष्कपटता, गंभीरता, समर्पण के विषय में भी अध्ययन करना चाहिए जो कि पवित्र नाम जप की सरल प्रक्रिया का पालन करते हुए हमारी ओर से आवश्यक हैं।

हरिनाम प्रभु की जय !!!

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