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जप प्रेरणा - किस से डरना चाहिए? - What to Fear From? - 11 May 20 – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu


किस से डरना चाहिए? 

What to Fear From?


जप प्रेरणा – 11 May 20 – Summary of Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

सारांश


- अपनी प्रार्थनाओं में, प्रह्लाद महाराज भगवान नरसिंह के क्रूर रूप से आदान प्रदान करने में अपनी निडरता और महान आत्मविश्वास व्यक्त करते हैं।

- वे कहते हैं, हालांकि आपके स्वरूप को देखकर देवताओं सहित पूरी दुनिया में सभी लोग भयभीत हैं, किन्तु मैं आपके स्वरूप से डरता नहीं हूं क्योंकि आपका रूप प्रेम का प्रतीक है। किन्तु वे विशेष रूप से कहते हैं कि मैं किसी और बात से अत्यधिक डरता हूं।

- इस दुनिया में लोग श्रेष्ठता के लिए प्रतिस्पर्धी मानसिकता रखते हैं, एक-दूसरे से ईर्ष्या करते हैं, एक-दूसरे पराजित कर, एक-दूसरे के शत्रु बन कर, सहयोगियों से संधि करके दुश्मनों से लड़ते हैं। इसलिए, प्रह्लाद ने कहा कि यह विशेष बात है जो मुझे सबसे बड़ा डर पैदा कर रही है।

- उन्होंने कहा, गुण संग के बुरे सहयोग से यह भौतिक दुनिया, विशेष रूप से रजोगुण तमोगुण संग किसी को भी आप के विषय में भूल सकती है। इसलिए आपको भूल जाना सबसे बड़ी विपत्ति है। यह आत्महत्या से भी निम्न है। इसलिए, मैं इस बुरी संगती से बहुत डरता हूं। कृपया मुझे इससे बचाएं।

- आजकल के समय में, हर दिशा में विभन्न प्रकार के अनेकों कुसंग विद्यमान है और कई बार तो ये भेष बदले हुए होता है।

- इसलिए व्यक्ति को सदैव बुरे तत्वों से सुरक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए और शुद्ध संग की आकांक्षा करनी चाहिए जो हमें शुद्ध करे और ऊपर की ओर बढ़ाये और हमें भगवान के कमल चरणों के निकट के जाए। वास्तव में, जब हम ऐसे संग में होते हैं, तब आध्यात्मिक जीवन अत्यधिक सरल होता है और आध्यात्मिक जीवन का अभ्यास, पवित्र नाम का जप और सभी भक्ति सिद्धांतों का अभ्यास करना अत्यधिक सरल होता है।


हरिनाम प्रभु की जय !!!


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हरे कृष्ण,

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