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जप प्रेरणा - मन के प्रति उदासीन बनें - Be Aloof from Mind - 21 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu


मन के प्रति उदासीन बनें 
Be Aloof from Mind

*जप प्रेरणा – 21 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu*

- जब हम पवित्र नामों का जप करते हैं तो यह सभी का अनुभव होता है कि मन इतने सारे नखरे करता है, बहुत सारे अलग-अलग काम करता है।

- प्रायः, जो व्यक्ति जप की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए उत्सुक है, वह बहुत व्याकुल हो सकता है या मन के व्यवहार को देखकर बहुत निराश हो सकता है, जो पूर्णतः अनियंत्रित प्रतीत होता है। किन्तु यदि कोई इस बात से व्याकुल या निराश हो जाता है, तो हमारा जप करने का भाव विकृत हो जाता है और जप के अंत में व्यक्ति को बहुत असंतोष अनुभव होता है।

- पवित्र नाम के जप के लिए आस-पास के वाह्य वातावरण से कुछ मात्र में उदासीनता और यहां तक कि अपने स्वयं के अशुद्ध मन, जो कि अनेकों प्रतिकूल ध्वनियाँ सुनाते हुए हमारे लिए शिरोवेदना उत्पन्न कर सकता है, से भी उदासीनता की कुछ मात्रा की आवश्यकता होती है।

- अतः जो लोग अपनी पूरी ऊर्जा के साथ बहुत अच्छी तरह से जप करते हैं उन्हें मन को शुद्ध करने में सहायता मिलती है।

- प्रभुपाद कहते हैं कि सदैव दो बल खींचते रहेंगे, एक है कृष्ण बल, और दूसरा है हमारे मन के अंदर माया का बल। और जैसे जैसे हम माया की व्याकुलता की अवज्ञा करते हुए कृष्ण बल पर अधिक से अधिक ध्यान देते हैं तब धीरे-धीरे कृष्ण शक्ति अधिक से अधिक सबल हो जाती है, और आप बहुत शांति से प्रह्लाद की तरह स्थित हो जाते हैं। और तब हम उस प्रकार की आध्यात्मिक शक्ति से मन को शुद्ध कर पाएंगे।

- यदि आप मन की हर छोटी-बड़ी व्याकुलता को गंभीरता से लेंगें, तो मन हमें हर ओर दौड़ता रह जाएगा और हम कृष्ण में निवेश नहीं कर पाएंगे।

- तो पवित्र नाम के जप के लिए हमारा समय, हमारी ऊर्जा, हमारे ह्रदय से पवित्र नाम को पुकारने की आवश्यकता है। हमारे तंत्र में पवित्र नाम का प्रभाव अनुभव करने के लिए हमारे जप के कम से कम कुछ भाग तो बहुत ही ध्यानपूर्वक और प्रार्थनापूर्ण होना ही चाहिए। 

हरिनाम प्रभु की जय !!!

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हरे कृष्ण,

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