Skip to main content

जप प्रेरणा - शांतिपूर्ण और प्रार्थनापूर्ण भाव से जप करने का उपाय - Way to Chant in Peaceful and Prayerful Mood - 29 April 20 – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

शांतिपूर्ण और प्रार्थनापूर्ण भाव से जप करने का उपाय 

Way to Chant in Peaceful and Prayerful Mood

जप प्रेरणा – 29 अप्रैल 20 – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu


हरे कृष्ण।

कल हमने इस बात पर चर्चा की थी, कि जो लोग देवोपासक हैं, उन्हें कम बुद्धिमान कहा जाता है, क्योंकि वे अस्थायी फलों के लिए द्वितीय प्राणियों से संपर्क कर रहे हैं। और जो लोग अवैयक्तिक हैं, वे बुद्धिहीन ही कहलाते हैं क्योंकि वे पूर्ण सत्य के निकट जाकर वे अपने स्वयं के अनुमान और ध्यान द्वारा अपने स्वयं के शास्त्र अध्ययन द्वारा निरपेक्ष सत्य का पता लगाना चाहते हैं। इसलिए, उन्हें प्राप्त होने वाला उच्चतम अनुभव अवैयक्तिक प्रकाश है, जो वास्तव में कृष्ण के चरण नख की आभा मात्र है, इतना ही उन्हें देखने को मिलता है। वे उस अनुभव से परे नहीं जा सकते।

अब भक्तों के रूप में हमारी पद्धति को एक वार विधि कहा जाता है। प्रभुपाद ने इसे उपदेशामृत में कहा, एक वार विधि का अर्थ है कि आप गुरु परम्परा में आने वाले शुद्ध वैष्णव को ढूंढते हैं और आप उनका आश्रय लेते हैं और तब यह एक लिफ्ट के समान है, जो आपको भगवान की प्राप्ति की उच्चतम स्तर तक ले जाएगा। और गुरु आपको आध्यात्मिक जगत में प्रवेश देंगे आप कृष्ण आमने सामने देख सकते हैं, और आप उनकी सेवा में सदा संलग्न रह सकते हैं।

हालांकि हम में से कई मान सकते हैं कि मैं तो पहले से ही इस एक वार विधि का पालन कर रहा हूं। यदि आप बहुत ध्यान से देखें तो वास्तव में इस विधि का पालन करने का अर्थ है,  सर्व प्रथम आचार्य और आध्यात्मिक गुरु को हृदय में विश्वास के साथ स्वीकार करना। और उन्हें स्वीकार करने का अर्थ है उनके निर्देशों को सुनना और उनके निर्देशों को हमारे जीवन में लागू करना जिसके बिना स्वीकृति निरर्थक है। और, भक्तिविनोद ठाकुर 4 अनर्थों के विषय में बात करते हैं

माया मुग्धास्य जीवस्य गयो
अनर्थस्य च चतुर्विधा
हृदयदौर्बल्यं अपराधो
असत्त्रिष्णा तत्वविभ्रम

हम पूर्व में तीन द्वारों शारीरिक द्वार, मानसिक द्वार और ह्रदय का द्वार के विषय में बात कर रहे थे। तो यहां तक कि कर्मी, ज्ञानी, योगी, वे भी बहुत सरलता से पहले दो द्वार खोल सकते हैं। इसका अर्थ है कि शरीर में हर चीज का अर्थ है,

युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु, और वह सब जो मानसिक द्वार को सही स्थापित करता है, द्वार खोलने का अर्थ है कि पसंद और नापसंद, संकल्प विक्ल्प, सुख दुःख और इस सब से मन को शांत रखना, जो इसे संतुलित करता है। तब मन आत्मिक जागरण के लिए शांत, शीतल और एकाग्र हो जाता है।

लेकिन तीसरे द्वार को आप अतीत और वर्तमान के अपराधों के कारण और एक वार के उपाय को पूरी निष्कपटता से स्वीकार नहीं करने के कारण खोल नहीं पाते हैं। हो सकता है कि हम इसे बहुत ही सतही रूप से ले रहे हों क्योंकि इसके कारण, हमारे ह्रदय में कृष्ण को आकर्षित करने के लिए आवश्यक जलवायु नहीं है। यहां तक कि हम खुद भी आकर्षित नहीं होते हैं। हमें न केवल अवशेष अनर्थ मिलते  हैं, अपितु ह्रदय के विभिन्न गुण भी हैं जो इसे अयोग्य बना रहे हैं। ठीक वैसे ही, जैसे भक्तिविनोद ठाकुर ने गीत में गाया है

आमार जीवन, सदा पाप रत, नाहिको पुन्येरा लेश
परेरे उद्वेग, दियाची ये कोटो, दियाची जिवेरे कलेश

तो, यह एक ऐसा गीत है, जिसमें बद्ध आत्मा का चित्रण किया गया है, जिसका हृदय दुखों और अनर्थों से भरा है, जो कि प्रभु को आकर्षित करने में बहुत बड़ी बाधा का काम करते हैं। जिसके कारण तीसरा द्वार बंद रहता है और खुलता नहीं है। इसलिए, इन ठोकरों को साफ करने का प्रयास करते हुए और इसके साथ, अपनी सीमाओं को जानकर, भगवान् से किसी भी बात की बहुत बड़ी आशा नहीं करना। व्यक्ति अपनी स्थिर साधना में, और धैर्यपूर्ण साधना में, और उत्साही और केंद्रित साधना में बहुत शांति से स्थित सकता है। आप ऐसा कर सकते हैं क्योंकि आप अच्छी तरह से जानते हैं कि ये बाधाएं अभी भी हैं, मैंने उन्हें साफ नहीं किया है। मैंने अपनी परीक्षा पास नहीं की है। फिर हमें किसी बड़े परिणाम की आशा  क्यों करनी चाहिए? अचानक, यह कितना मूर्खतापूर्ण होगा कि तीसरा द्वार अचानक खुल जाए और कृष्ण वहां प्रकट हो जाए और मेरा स्वागत करें और मुझे अंदर ले जाएँ। मैं योग्य नहीं हूं। इसलिए, यह मेरी योग्यता के लिए काम नहीं कर सकता है। तो इस प्रकार से हमारा जप बहुत ही शांतिपूर्ण और प्रार्थनापूर्ण भाव में हो सकता है यदि हम तीसरे द्वार को खोलने में हमारी सीमाओं को समझते हैं।

हरिनाम प्रभु की जय!

=================================================
हरे कृष्ण,

इस्कॉन पुणे से जप प्रवचन/पुस्तक अंश के रूप में दैनिक जप प्रेरणा (अंग्रेज़ी और हिंदी भाषा में अनुलेख और अनुवाद के साथ)साझा करने के लिए समूह।

समूह से जुड़ने के लिये इस लिंक को अपने मोबाइल में खोलें:
https://chat.whatsapp.com/KuFWEVyKSM3JwaFamsze56 
(हरैर नामैव केवलम्10 - HNK)

(यदि आप पहले से किसी भी "हरैर नामैव केवलम् - HNK" समूह से जुडें हैं तो कृपया इस लिंक को क्लिक न करें)
=================================================

Comments

Popular posts from this blog

जप प्रेरणा - कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं - Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can - 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं  Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can जप प्रेरणा – 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - यदि कोई अनन्य भक्ति का अभ्यास करता है, तो वह अपनी स्वयं की योजनाओं से भी अधिक सुख-सुविधा और सेवा पा सकता जब भगवान कृष्ण उसकी देखभाल करते हैं। वास्तव में हम स्वयं का उतना ध्यान नहीं रख सकते हैं जितना कृष्ण हमारा अच्छी तरह से ध्यान रख सकते हैं। जैसे एक बच्चा अपने लिए उतनी अच्छी सेवा नहीं कर सकता, जितनी माँ और पिता उसके लिए कर सकते हैं क्योंकि वे उसके सच्चे कल्याण को जानते हैं। और बच्चा नटखट और उद्दंड हो सकता है। कुछ सुख पाने के नाम पर वह कुछ गन्दी चीज खरीद सकता है और खा सकता है और बीमार हो सकता है। उसी प्रकार हम बद्ध आत्मा होने के कारण ये नहीं जानते कि हमारे लिए क्या अच्छा है लेकिन कृष्ण जानते हैं कि हमारे लिए सबसे उत्तम क्या है। - और एक बार जब आप इस विषय में आश्वस्त हो जाते हैं, तो आप अपना समय कृष्ण की सेवा में लगा सकते हैं, आप अपनी ऊर्जा और धन कृष्ण सेवा में व्यय कर सकते हैं, आप ...

जप प्रेरणा – पवित्र नाम सभी व्याधियों को ठीक करता है - १७ फरवरी २०

जप प्रेरणा – १७ फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य से अंश। पवित्र नाम सभी व्याधियों को ठीक करता है। (श्रील गौर गोविंद स्वामी महाराज का एक लेख) यदि कोई अपने कान खोलता है और गौरांग महाप्रभु की मधुर लीला को प्रवेश करने की अनुमति देता है, तो उसका हृदय सभी भौतिक संदूषणों से मुक्त हो जाएगा। हृदय शुद्ध हो जाएगा। आप हृदय को और कैसे शुद्ध कर सकते हैं? क्या कोई चिकित्सा वैज्ञानिक है जो जानता है कि ऐसा कैसे करना है? चिकित्सा वैज्ञानिक आपके आंत्र को साफ कर सकते हैं, लेकिन वह आपके ह्रदय को साफ नहीं कर सकते हैं। प्रार्थना में नरोत्तम दास ठाकुर पध्यती देते हैं - चैतन्य महाप्रभु की मधुर लीलाएँ सुनें - गौरान्गेर मधुरा-लीला, जार करने प्रवेसिला, ह्रदय निर्मला भेलो तार - तब हृदय निर्मल हो जाता है। निम्नलिखित श्लोकों में, हम सीखते हैं कि जप से न केवल हृदय रोग ठीक होता है, बल्कि शारीरिक रोग भी ठीक होते हैं अच्युतानंद गोविन्द नामोच्चारण भिशितः नश्यन्ति सकला रोगः सत्यम सत्यम वदामी अहम्  (ब्रहन-नारदीय पुराण से) मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि यह सच है। अच्युता, आनंद और...

जप प्रेरणा - श्रद्धा का अर्थ है रुचि, विश्वास और सम्मान - Shraddha Means Interest, Faith and Respect - 24 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

श्रद्धा का अर्थ है रुचि, विश्वास और सम्मान  Shraddha Means Interest, Faith and Respect जप प्रेरणा – 24 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - श्रील प्रभुपाद ने श्रद्धा शब्द का तीन अलग-अलग अर्थों में अनुवाद किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा का अर्थ है रुचि, श्रद्धा का अर्थ है विश्वास, श्रद्धा का अर्थ है सम्मान। - तो यदि किसी को पवित्र नाम पर श्रद्धा है, तो उसे जप में रुचि होगी, उसे पवित्र नामों की शक्ति के प्रति सम्मान होगा। - और यदि किसी को विश्वास या रुचि या सम्मान नहीं है, तो ऐसे लोग भी हैं जो पवित्र नामों की आलोचना करते हैं कि ये शक्तिहीन है, जो कि वास्तव में उनके अपने दोषों के कारण है। अतः वे पवित्र नाम में दोष ढूंढते हैं और चले जाते हैं और दूषित ही रहते हैं। - किन्तु जो पवित्र नाम में विश्वास और सम्मान रखते हैं, उन्हें पवित्र नाम में रुचि होगी, और वे पवित्र नाम को अपने हृदयों में प्रकट होने देंगे और उनके हृदयों में अशुद्धियों को शुद्ध करेंगे। हरिनाम प्रभु की जय !!! ================================================= हरे कृष्ण , इस्कॉन पुण...