Skip to main content

जप प्रेरणा - भगवान् की कृपा के प्रकार - Types of Lord’s Mercy - २ अप्रैल २० - Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

भगवान् की कृपा के प्रकार - Types of Lord’s Mercy

जप प्रेरणा - २ अप्रैल २० – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

हरे कृष्ण,

सर्वोच्च भगवान् की कृपा दो प्रकार की होती है। एक को स्वरूप शक्तिमयी कृपा कहा जाता है, दूसरी को महा शक्तिमयी कृपा कहा जाता है। भौतिक जगत में, भगवान की महा शक्तिमयी कृपा प्रत्येक ब्रह्माण्ड के भीतर 14 ग्रह मंडलों का विस्तार करती है और भगवान इन ग्रह मंडलों को भौतिक सुखों की अनेक किस्मों से भरते हैं चाहे उच्च ग्रह मंडल हों या निम्न ग्रह मंडल या मध्य गृह मंडल, हर जगह रहने वाली जीवात्माओं को भौतिक शरीर और भौतिक इन्द्रिय तृप्ति प्रदान की जाती उसके पीछे भागने के लिए और जो कुछ भी वे मूर्खता से आनंद मानते हैं उसका आनंद लेते हैं। भगवान जीवात्मा के साथ उस स्थिति तक भी जाते हैं, जब वन मल खाने की इच्छा करती हैं, घृणित चीजें खाती हैं, घृणित चीजें बोलती हैं, घृणित व्यवहार करती हैं। और भगवान जीव को किसी भी चरम सीमा तक जाने देते हैं, ठीक उसी तरह जैसे एक बहुत दयालु पिता बच्चे को गलतियाँ करने और सबक सीखने की अनुमति देता है।

लेकिन जब जीवात्माएं अत्यधिक पतित हो जाती हैं, तो एक दूसरे को हानि पहुंचाते हैं, जैसे एक परिवार में, एक बच्चा दुसरे को वास्तव में पीट सकता है, काट सकता है और मार सकता है। तब पिता कहते हैं, उनके लिए सिरदर्द हो जाता है तब दुर्गा देवी के माध्यम से स्थिति को ठीक करने, भगवान दोनों प्रकार के दुखों को भेजते हैं जो विभिन्न नामों से आते हैं जैसे कि अधियात्मिक, अधिभौतिक, अधिदैविक वर्ण। फिर जब जीवित संस्थाओं को भारी महामारी का सामना करना पड़ता है, जो पूरे जगत में फैल जाती है, कभी-कभी आबादी का एक तिहाई हिस्सा तक मिटा देती है, तो जीवात्माएं पछताती हैं और शोक करती हैं, पश्चाताप करती हैं, एक दूसरे पर और अपनी दूषित गतिविधियों को कम करती हैं। इससे उन्हें परम भगवान् की ओर उन्मुख होने का अवसर मिलता है। तो, यह महा शक्तिमयी कृपा है, जिसमें जीवों को कृष्ण की परोक्ष कृपा मिलती है।

दूसरी ओर कृष्ण की प्रत्यक्ष कृपा है, स्वरूप शक्तिमयी कृपा, जहाँ जीवात्मा की निष्कपटता को देखते हुए भगवान उस पर उपकार करते हैं, और उसे परम भगवान् के नाम रूप गुण लीला और गतिविधियों को सुनने और भगवान की भक्ति में लगने में रूचि देते हैं और उन्हें भगवान् की और उन्मुख होने का सीधा अवसर देतें हैं। और सीधे भगवान् की कृपा का अनुभव होता है, जो कि वास्तव में भगवान् की इच्छा है।

तो यह एक ऐसा मंच है जहां भगवान् की इच्छा और जीव की इच्छा दोनों मेल खाते हैं। तो यह हमारे हित में है कि पवित्र नाम के जप के द्वारा स्वरूप शक्तिमयी कृपा का दूसरा वाला विकल्प चुनें, हमारे हृदय को शुद्ध करें और स्वयं को भक्ति में संलग्न करें और अपनी इंद्रियों और मन को शुद्ध करें।

और भगवान् की इच्छा के साथ संरेखित हो कर, हम प्रसन्न हो जाते हैं और हम उन्हें भी प्रसन्न करते हैं। अन्यथा परोक्ष कृपा पिटाई और लातों और थप्पड़ द्वारा अच्छे सबक सीखने का एक बहुत ही टेढ़ा तरीका है, जो वास्तव में जीव और भगवान् दोनों के लिए पीड़ादायक है जो अपने बच्चों को पीड़ित देखने में पीड़ा अनुभव करतें हैं।

इसलिए, बिना किसी हिचकिचाहट के, पूरे आत्मविश्वास के साथ, हृदय को शुद्ध करने की बहुत ही प्रबल इच्छा के साथ पवित्र नाम का जप करना चाहिए यदि कोई इस भौतिक दुनिया में महा माया शक्ति के साथ अपने सम्बन्ध को समाप्त करने के विषय में वास्तव में गंभीर है।

हरिनाम प्रभु की जय!

=================================================
हरे कृष्ण,

इस्कॉन पुणे से जप प्रवचन/पुस्तक अंश के रूप में दैनिक जप प्रेरणा (अंग्रेज़ी और हिंदी भाषा में अनुलेख और अनुवाद के साथ)साझा करने के लिए समूह।

समूह से जुड़ने के लिये इस लिंक को अपने मोबाइल में खोलें:
https://chat.whatsapp.com/KuFWEVyKSM3JwaFamsze56 
(हरैर नामैव केवलम्10 - HNK)

(यदि आप पहले से किसी भी "हरैर नामैव केवलम् - HNK" समूह से जुडें हैं तो कृपया इस लिंक को क्लिक न करें)
=================================================

Comments

Popular posts from this blog

जप प्रेरणा - कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं - Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can - 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं  Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can जप प्रेरणा – 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - यदि कोई अनन्य भक्ति का अभ्यास करता है, तो वह अपनी स्वयं की योजनाओं से भी अधिक सुख-सुविधा और सेवा पा सकता जब भगवान कृष्ण उसकी देखभाल करते हैं। वास्तव में हम स्वयं का उतना ध्यान नहीं रख सकते हैं जितना कृष्ण हमारा अच्छी तरह से ध्यान रख सकते हैं। जैसे एक बच्चा अपने लिए उतनी अच्छी सेवा नहीं कर सकता, जितनी माँ और पिता उसके लिए कर सकते हैं क्योंकि वे उसके सच्चे कल्याण को जानते हैं। और बच्चा नटखट और उद्दंड हो सकता है। कुछ सुख पाने के नाम पर वह कुछ गन्दी चीज खरीद सकता है और खा सकता है और बीमार हो सकता है। उसी प्रकार हम बद्ध आत्मा होने के कारण ये नहीं जानते कि हमारे लिए क्या अच्छा है लेकिन कृष्ण जानते हैं कि हमारे लिए सबसे उत्तम क्या है। - और एक बार जब आप इस विषय में आश्वस्त हो जाते हैं, तो आप अपना समय कृष्ण की सेवा में लगा सकते हैं, आप अपनी ऊर्जा और धन कृष्ण सेवा में व्यय कर सकते हैं, आप ...

जप प्रेरणा – पवित्र नाम सभी व्याधियों को ठीक करता है - १७ फरवरी २०

जप प्रेरणा – १७ फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य से अंश। पवित्र नाम सभी व्याधियों को ठीक करता है। (श्रील गौर गोविंद स्वामी महाराज का एक लेख) यदि कोई अपने कान खोलता है और गौरांग महाप्रभु की मधुर लीला को प्रवेश करने की अनुमति देता है, तो उसका हृदय सभी भौतिक संदूषणों से मुक्त हो जाएगा। हृदय शुद्ध हो जाएगा। आप हृदय को और कैसे शुद्ध कर सकते हैं? क्या कोई चिकित्सा वैज्ञानिक है जो जानता है कि ऐसा कैसे करना है? चिकित्सा वैज्ञानिक आपके आंत्र को साफ कर सकते हैं, लेकिन वह आपके ह्रदय को साफ नहीं कर सकते हैं। प्रार्थना में नरोत्तम दास ठाकुर पध्यती देते हैं - चैतन्य महाप्रभु की मधुर लीलाएँ सुनें - गौरान्गेर मधुरा-लीला, जार करने प्रवेसिला, ह्रदय निर्मला भेलो तार - तब हृदय निर्मल हो जाता है। निम्नलिखित श्लोकों में, हम सीखते हैं कि जप से न केवल हृदय रोग ठीक होता है, बल्कि शारीरिक रोग भी ठीक होते हैं अच्युतानंद गोविन्द नामोच्चारण भिशितः नश्यन्ति सकला रोगः सत्यम सत्यम वदामी अहम्  (ब्रहन-नारदीय पुराण से) मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि यह सच है। अच्युता, आनंद और...

जप प्रेरणा - श्रद्धा का अर्थ है रुचि, विश्वास और सम्मान - Shraddha Means Interest, Faith and Respect - 24 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

श्रद्धा का अर्थ है रुचि, विश्वास और सम्मान  Shraddha Means Interest, Faith and Respect जप प्रेरणा – 24 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - श्रील प्रभुपाद ने श्रद्धा शब्द का तीन अलग-अलग अर्थों में अनुवाद किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा का अर्थ है रुचि, श्रद्धा का अर्थ है विश्वास, श्रद्धा का अर्थ है सम्मान। - तो यदि किसी को पवित्र नाम पर श्रद्धा है, तो उसे जप में रुचि होगी, उसे पवित्र नामों की शक्ति के प्रति सम्मान होगा। - और यदि किसी को विश्वास या रुचि या सम्मान नहीं है, तो ऐसे लोग भी हैं जो पवित्र नामों की आलोचना करते हैं कि ये शक्तिहीन है, जो कि वास्तव में उनके अपने दोषों के कारण है। अतः वे पवित्र नाम में दोष ढूंढते हैं और चले जाते हैं और दूषित ही रहते हैं। - किन्तु जो पवित्र नाम में विश्वास और सम्मान रखते हैं, उन्हें पवित्र नाम में रुचि होगी, और वे पवित्र नाम को अपने हृदयों में प्रकट होने देंगे और उनके हृदयों में अशुद्धियों को शुद्ध करेंगे। हरिनाम प्रभु की जय !!! ================================================= हरे कृष्ण , इस्कॉन पुण...