Skip to main content

जप प्रेरणा - सुधारगृह में दोषनिवृत्त होने के लिए ध्यानपूर्वक जप करें - Chant Attentively to be Reformed in the House of Correction - १० अप्रैल २० – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

सुधारगृह में दोषनिवृत्त होने के लिए ध्यानपूर्वक जप करें 

Chant Attentively to be Reformed in the House of Correction

जप प्रेरणा - १० अप्रैल २० – Hindi Translation of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

हरे कृष्ण।

हर दिन कृष्ण के पवित्र नामों का जप कृष्ण के साथ सम्बन्ध की मूल भावना के साथ किया जाना चाहिए।

वह सम्बन्ध क्या है? मैं अणु चेतना वाला एक तुच्छ जीव हूँ और कृष्ण का शाश्वत सेवक हूँ। और कृष्ण अनंत चेतना वाले सर्वोच्च भगवान हैं और मेरे स्वामी हैं। और भौतिक जगत एक सुधार गृह है। और मैं यहाँ इस जगत में सुधार किये जाने के लिए हूँ।

किसलिए सुधार किया जाना है? मुझे इस सम्बन्ध में अपनी अनुपस्थित मानसिकता के कारण सुधार करना होगा। इसलिए जब मैं अपने स्वामी के साथ अपने संबंध में अनुपस्थित रहता हूं और उसे सुधारना पड़ता है क्योंकि उस अनुपस्थित मानसिकता से ध्यानरहितता और असावधानी, अपराधी वृत्ति, और जीव के लिए बहुत बड़ा संकट आता है, और मुझे व्यथित करता है।

तो, आप इस जगत में देखेंगे कि हम सभी इतने सारे लोगों के साथ अपने संबंधों की घोषणा करते हैं, ओह, मैं इस व्यक्ति का बेटा हूं, और मैं अमुक व्यक्ति की बेटी हूं। मैं ऐसे व्यक्ति का भाई या बहन या चाचा या चाची या दादी या दादा हूं। इसलिए हम इस दुनिया में कुछ लोगों के साथ संबंध अनुभव करते हैं। और हम उस संपर्क का दावा करते हैं।

इसी तरह, जब आप जप करने के लिए धरती पर बैठे होते हैं, तो आप जानते हैं कि मैं धरती पर बैठा हूं, आप धरती के संबंध में अपनी स्थिति जानते हैं। यदि आप कार में बैठे हैं और यात्रा कर रहे हैं, तो आप जानते हैं कि मैं कार में बैठा हूं। तो, हम सदैव अपनी स्थिति से संबंधित रहते हैं कि हम किससे जुड़े हैं। उसी तरह, कम से कम सुबह जप के दो घंटों के समय, व्यक्ति को कृष्ण के साथ व्यक्तिगत संबंध देखना चाहिए, कि कृष्ण अनंत चेतना के साथ सर्वोच्च भगवान हैं, और मेरे स्वामी हैं और मैं अणु चेतना वाला एक तुच्छ जीव हूं मैं कृष्ण का सेवक हूं।

भौतिक जगत एक सुधार गृह है। और मुझे अपनी अनुपस्थित मानसिकता को सुधारना होगा। और इस सम्बन्ध को दृढ़ता से प्रबल करना होगा। इसलिए भगवान चैतन्य महाप्रभु ने यह सिखाया

अयि नन्दतनुज किंकरं पतितं मां विषमे भवाम्बुधौ।
कृपया तव पादपंकज-स्थितधूलिसदृशं विचिन्तय॥ श्री शिक्षाष्टकम् ५॥

उन्होंने कहा, हे मेरे प्रिय भगवान कृष्ण। यद्यपि मैं आपसे संबंधित हूं, मैं इस भौतिक जगत में इतनी दूर आ गया हूं, मैं जन्म और मृत्यु के इस महासागर में गिर गया हूं। कृपया मुझे मृत्यु के इस महासागर से उठाएं और मुझे अपने चरण कमलों की लाखों अणु चेतनाओं के बीच में रख दें और आपके चरण कमलों में लाखों आत्माओं में से एक के रूप में स्वीकार करें।

इसलिए यदि वह वास्तव में कृष्ण के साथ इस संबंध को तौलता है, कृष्ण के साथ अपने संबंधों को महत्व देता है, और हम इस रिश्ते को सींचना चाहते हैं और इसे ढृढ़ करना चाहते हैं, जिसके लिए गुरु ने हमें दीक्षा दी है, उसने हमें एक नाम दिया है, उन्होंने हमें माला दी है। तो हम सुबह जल्दी उठकर पवित्र नाम का जप करेंगे और ध्यानपूर्वक इसे सुनेंगे ताकि दिन प्रतिदिन हम कृष्ण से दूर नहीं होंगे बल्कि हम कृष्ण के निकट और निकट आते जाएंगे। और वे लोग जो इस सम्बन्ध को भूले हुए हैं, वे शायद सुबह के समय, ब्रह्म मुहूर्त के समय, इस सम्बन्ध के प्रति न जागते हुए, इस सम्बन्ध को मजबूत नहीं बनाते हुए और कृष्ण के निकट नहीं, बल्कि माया की गोद में सोते रह सकते हैं। और परिणाम होगा जन्म और मृत्यु का चक्र।

क्योंकि इस सुधार गृह में, हमें इस सम्बन्ध में अनुपस्थित मन नहीं होने के लिए सुधार करना होगा। यदि हम सम्बन्ध को ढृढ़ करने के इच्छुक हैं, तो हमें न केवल शारीरिक रूप से जागृत होना होगा, बल्कि हमें आध्यात्मिक रूप से भी जागृत होना होगा, आध्यात्मिक रूप से जागने होने का अर्थ है, आध्यात्मिक रूप से सम्बन्ध को समझना और पवित्र नामों को पुकारना।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

हरिनाम प्रभु की जय!

=================================================
हरे कृष्ण,

इस्कॉन पुणे से जप प्रवचन/पुस्तक अंश के रूप में दैनिक जप प्रेरणा (अंग्रेज़ी और हिंदी भाषा में अनुलेख और अनुवाद के साथ)साझा करने के लिए समूह।

समूह से जुड़ने के लिये इस लिंक को अपने मोबाइल में खोलें:
https://chat.whatsapp.com/KuFWEVyKSM3JwaFamsze56 
(हरैर नामैव केवलम्10 - HNK)

(यदि आप पहले से किसी भी "हरैर नामैव केवलम् - HNK" समूह से जुडें हैं तो कृपया इस लिंक को क्लिक न करें)
=================================================

Comments

Popular posts from this blog

जप प्रेरणा - कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं - Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can - 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं  Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can जप प्रेरणा – 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - यदि कोई अनन्य भक्ति का अभ्यास करता है, तो वह अपनी स्वयं की योजनाओं से भी अधिक सुख-सुविधा और सेवा पा सकता जब भगवान कृष्ण उसकी देखभाल करते हैं। वास्तव में हम स्वयं का उतना ध्यान नहीं रख सकते हैं जितना कृष्ण हमारा अच्छी तरह से ध्यान रख सकते हैं। जैसे एक बच्चा अपने लिए उतनी अच्छी सेवा नहीं कर सकता, जितनी माँ और पिता उसके लिए कर सकते हैं क्योंकि वे उसके सच्चे कल्याण को जानते हैं। और बच्चा नटखट और उद्दंड हो सकता है। कुछ सुख पाने के नाम पर वह कुछ गन्दी चीज खरीद सकता है और खा सकता है और बीमार हो सकता है। उसी प्रकार हम बद्ध आत्मा होने के कारण ये नहीं जानते कि हमारे लिए क्या अच्छा है लेकिन कृष्ण जानते हैं कि हमारे लिए सबसे उत्तम क्या है। - और एक बार जब आप इस विषय में आश्वस्त हो जाते हैं, तो आप अपना समय कृष्ण की सेवा में लगा सकते हैं, आप अपनी ऊर्जा और धन कृष्ण सेवा में व्यय कर सकते हैं, आप ...

जप प्रेरणा – पवित्र नाम सभी व्याधियों को ठीक करता है - १७ फरवरी २०

जप प्रेरणा – १७ फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य से अंश। पवित्र नाम सभी व्याधियों को ठीक करता है। (श्रील गौर गोविंद स्वामी महाराज का एक लेख) यदि कोई अपने कान खोलता है और गौरांग महाप्रभु की मधुर लीला को प्रवेश करने की अनुमति देता है, तो उसका हृदय सभी भौतिक संदूषणों से मुक्त हो जाएगा। हृदय शुद्ध हो जाएगा। आप हृदय को और कैसे शुद्ध कर सकते हैं? क्या कोई चिकित्सा वैज्ञानिक है जो जानता है कि ऐसा कैसे करना है? चिकित्सा वैज्ञानिक आपके आंत्र को साफ कर सकते हैं, लेकिन वह आपके ह्रदय को साफ नहीं कर सकते हैं। प्रार्थना में नरोत्तम दास ठाकुर पध्यती देते हैं - चैतन्य महाप्रभु की मधुर लीलाएँ सुनें - गौरान्गेर मधुरा-लीला, जार करने प्रवेसिला, ह्रदय निर्मला भेलो तार - तब हृदय निर्मल हो जाता है। निम्नलिखित श्लोकों में, हम सीखते हैं कि जप से न केवल हृदय रोग ठीक होता है, बल्कि शारीरिक रोग भी ठीक होते हैं अच्युतानंद गोविन्द नामोच्चारण भिशितः नश्यन्ति सकला रोगः सत्यम सत्यम वदामी अहम्  (ब्रहन-नारदीय पुराण से) मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि यह सच है। अच्युता, आनंद और...

जप प्रेरणा - श्रद्धा का अर्थ है रुचि, विश्वास और सम्मान - Shraddha Means Interest, Faith and Respect - 24 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

श्रद्धा का अर्थ है रुचि, विश्वास और सम्मान  Shraddha Means Interest, Faith and Respect जप प्रेरणा – 24 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - श्रील प्रभुपाद ने श्रद्धा शब्द का तीन अलग-अलग अर्थों में अनुवाद किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा का अर्थ है रुचि, श्रद्धा का अर्थ है विश्वास, श्रद्धा का अर्थ है सम्मान। - तो यदि किसी को पवित्र नाम पर श्रद्धा है, तो उसे जप में रुचि होगी, उसे पवित्र नामों की शक्ति के प्रति सम्मान होगा। - और यदि किसी को विश्वास या रुचि या सम्मान नहीं है, तो ऐसे लोग भी हैं जो पवित्र नामों की आलोचना करते हैं कि ये शक्तिहीन है, जो कि वास्तव में उनके अपने दोषों के कारण है। अतः वे पवित्र नाम में दोष ढूंढते हैं और चले जाते हैं और दूषित ही रहते हैं। - किन्तु जो पवित्र नाम में विश्वास और सम्मान रखते हैं, उन्हें पवित्र नाम में रुचि होगी, और वे पवित्र नाम को अपने हृदयों में प्रकट होने देंगे और उनके हृदयों में अशुद्धियों को शुद्ध करेंगे। हरिनाम प्रभु की जय !!! ================================================= हरे कृष्ण , इस्कॉन पुण...