ह्रदय को संरेखित करना
जप प्रेरणा – २ मार्च २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम से अंश।
तीसरा और अंतिम द्वार जो हमें हमारे अभ्यास के लिए पार करना है, भक्ति भावनाओं से भरा ह्रदय लाना। कैसे? हम उन भगवान् के विषय में सोचने से आरम्भ करते हैं, जिसका नाम हम जप रहे हैं। यद्यपि, जैसे ही हम कृष्ण के बारे में सोचने का प्रयास करते हैं, जिनकी हमें आवश्यकता है, हम अन्य चिंताओं को अपने हह्रदय में पायेंगे, साथी, भव्य घरों, गैजेट्स, धन, प्रसिद्धि, आराधना, प्रतिष्ठा और विलासिता आदि के लिए तरस रहे हैं। ये सब हमारे जीवन की पीड़ा हैं। किंतु यदि हम इन सभी इच्छाओं को उनके मूल में देखतें हैं, तो हम पाएंगे कि सतह के नीचे प्यार, आश्रय, स्थिरता, प्रशंसा, आराम, सुरक्षा, आदि की आवश्यकता है और इसके मूल में कृष्ण के लिए हमारी वास्तविक आवश्यकता है। केवल वे ही एक है जो इन सभी आवश्यकताओं को पूरा कर सकतें हैं। वास्तव में, यह हमारी कृष्ण को पाने की प्राचीन लालसा ही है जो इन कम, सतही चीजों के लिए स्थानापन्न हो गयी है। इसलिए, हम अपने भक्तिपूर्ण ह्रदय से जुड़ते हैं जब हम ये समझते हैं, "कृष्ण, मैं केवल वास्तव में आपको चाहता हूं। केवल आपके साथ मैं वास्तव में प्रसन्न रहूंगा।"हमारे खोए हुए हृदय को पुनः प्राप्त करना।
हम सभी अपने भौतिक अंग हृदय के बारे में जानते हैं, जो हमारे पूरे शरीर में रक्त भेजता है। हमारे पास एक भावनात्मक दिल भी है। मित्रता, सामुदायिक प्रसन्नता, अखंडता, प्यार, आंतरिक शांति, साथ ही दर्द और हानि की भावनाओं के लिए निवास होता है। हालांकि, एक तीसरा और अक्सर अनदेखा किया जाने वाला ह्रदय है, यह सबसे महत्वपूर्ण हृदय है, आध्यात्मिक हृदय। यह वह जगह है जहाँ हमारा वास्तविक शाश्वत आत्म निवास करता है। दुर्भाग्य से, वर्तमान जगत में हमारी दैनिक गतिविधियों के दौरान, यह ह्रदय आसानी से ढंक जाता है। यह लगभग पुर्णतः खो चूका है और इसे उजागर करना और पुनर्जीवित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्योंकि केवल स्वस्थ आध्यात्मिक हृदय के साथ ही आध्यात्मिक जीवन फल-फूल सकता है। अगर आध्यात्मिक दिल अस्वस्थ है, तो हम आध्यात्मिक रूप से मृत हैं।
तो हमारे आध्यात्मिक हृदय को कैसे खोजें और पुनर्जीवित करें? हमें कृष्ण के साथ भक्तिमय संबंध में प्रवेश करना चाहिए। तीसरा ह्रदय आध्यात्मिक संबंधों में प्रेम का अनुभव करने और व्यक्त करने के लिए बनाया गया है जो सक्रिय रूप से पोषित हो रहे हैं, कर्तव्य की भावना से प्रेरित यांत्रिक अभ्यास या हमारे साथ क्या होगा इसका डर है यदि आप वह सब नहीं करते हैं जो पवित्रशास्त्र में वर्णित है तो वास्तव में ये ये हमें लंबे समय तक जीवन दाई अमृत में प्रवेश करने में हमारी सहायता नहीं करेगा। केवल एक जीवंत भक्तिमय संबंध हमारे साथ आदान-प्रदान करने और हमारी लालसाओं का उत्तर देने के लिए भगवान् को प्रभावित कर सकता है। भावना के साथ कृष्ण के पास पहुंचने से हम भक्ति में एक गतिशील जीवन के लिए स्विच को बदल देंगे और इस तरह हमारे तीन ह्रदय संतुष्ट होंगे। हमारे आध्यात्मिक हृदय के भीतर के इस सबसे गहरे स्थान से हमें जप या कीर्तन करना चाहिए जो हमें उस दिव्य युगल से सेवा के लिए याचना करनी चाहिए। इस तरह हम निष्कपटता से भगवान् की ओर मुड़ सकते हैं और भक्ति के साथ उन्हें संबोधित कर सकते हैं।
एक सुंदर प्रार्थना है, जहां एक भक्त ऐसी सहज भक्ति भावनाओं के लिए याचना करता है। जैसे युवा पुरुष युवा महिलाओं की इच्छा करते हैं और युवा महिलाएं युवा पुरुषों की इच्छा करती हैं, "मेरे प्यारे भगवान, मेरा मन आपके प्रति आकर्षित हो जाए।" यह वह भावना है जो भक्त व्यक्त करते हैं जब वे पुराने कर्मों के प्रभावों और उन इच्छाओं को छोड़ देना चाहते है जो उनके आध्यात्मिक हृदय के द्वार को संक्रमित करते हैं।
हमें ह्रदय के मंदिर में मार्ग को साफ करने के लिए उत्सुक होना चाहिए, जहां हम अपनी वास्तविक आत्म अभिव्यक्ति और आध्यात्मिक इच्छाशक्ति पाएंगे। यदि हम उस मार्ग का अनुसरण करते हैं, तो कृष्ण तुरंत चौकस हो जाएंगे। ओह, यहाँ कोई मुझे बुला रहा है। मुझे उसे अपनी देखरेख में अपनाना चाहिए। वह अब मेरा है। कृष्ण उत्तर देते हैं जब हम उन्हें अपने पूर्णतः खुले हुए हृदयों से पुकारते हैं। जप से पहले अगर हमारा ह्रदय बंद भी हो, तो भी यह खुल जाएगा कि यदि हम वास्तव में अपने आध्यात्मिक ह्रदय से सर्वोत्तम जप करें।
श्री हरिनाम प्रभु की जय!
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हरे कृष्ण,
उपरोक्त परम पूज्य सचिनंदन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम के अंश का हिंदी में अनुवाद है। इस पुस्तक के विषय में और अधिक जानकारी के लिए कृपया ये लिंक पर जाइये
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