जप प्रेरणा – शुद्ध पवित्र नाम - ९ फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य से अंश।
जप प्रेरणा – ९ फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य से अंश।
शुद्ध नाम - शुद्ध पवित्र नाम, भौतिक जिव्हा का उत्पाद नहीं अपितु एक दिव्य उपहार है।
जब कोई भक्त शुद्ध नाम का जप करता है तो क्या होता है? इसका सरल उत्तर यह है कि कृष्ण व्यक्तिगत रूप से जपकर्ता के हृदय में उतरते हैं, और वहां से उनकी जिव्हा पर प्रकट होते हैं। हरि भक्ति कल्प लतिका में यह बहुत ही विस्तार से समझाया गया है, कृष्ण श्रवण करते हुए कर्ण में प्रवेश करते हैं और हृदय के कुंड आप्लावित हो जाता है। वे मुख से अपने पारलौकिक गुणों, नामों और रूपों में एक तीव्र प्रवाहित धारा के रूप में निकलते हैं। हमें अत्यंत सावधानी से ध्यान देना चाहिए कि भौतिक जिव्हा कभी भी शुद्ध पवित्र नाम की ध्वनि उत्पन्न नहीं कर सकती है। हमारी जिव्हा और स्वर तंत्र सभी तरह की भाषाओं में कई तरह की आवाजें उत्पन्न कर सकते हैं, किंतु पवित्र नाम की ध्वनि कुछ भिन्न है।
जिस प्रकार रेत से शुद्ध सोना निकालना असंभव है, चाहे हम रेत के साथ कुछ भी करें। उसी प्रकार हम हमारे ध्वनि प्रक्रियाओं के साथ कुछ भी करें, हम कभी भी भगवान कृष्ण के नाम को उत्पादन नहीं कर सकते हैं, जो एक आध्यात्मिक ध्वनि है। कृष्ण को स्वयं हमें वह नाम देना होगा। वे स्वयं अपनी दिव्य ऊर्जा से भक्तों को स्वयं से अवगत कराते हैं। वे हमारे प्रयासों से प्रकट नहीं होते हैं। दूसरे शब्दों में, हम कभी भी स्वयं आध्यात्मिक आयाम पर चढ़कर अपनी इच्छा से भगवान् से नहीं मिल सकते हैं। लेकिन भगवान् दया करके हमारे स्तर तक उतर सकते हैं, और, यदि वे प्रसन्न होते हैं, तो हमें स्वयं को प्रकट करते हैं।
हरिनाम प्रभु की जय!!!
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हरे कृष्ण,
उपरोक्त परम पूज्य सचिनंदन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य के अंश का हिंदी में अनुवाद है। इस पुस्तक के विषय में और अधिक जानकारी के लिए कृपया ये लिंक पर जाइये
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