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जप प्रेरणा – जप की बुरी आदतों को सुधारना भी कृष्ण की एक सेवा है - २३ फरवरी २० (द लिविंग नेम, The Living Name)

जप प्रेरणा – २३ फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम से अंश।

जप की बुरी आदतों को सुधारना भी कृष्ण की एक सेवा है।

एक योद्धा के बारे में एक किंवदंती है जिसने निर्देश के लिए युद्ध कला के एक गुरु से संपर्क किया। यह योद्धा कई लड़ाइयों में लड़ चुका था, उसके तीर विरला ही कभी विफल होते थे। आश्वस्त होते हुए कि उसे केवल अपने वर्तमान कौशल को सुधारने की आवश्यकता है उसने सोचा कि उसका प्रशिक्षण संक्षिप्त होगा। उसे आश्चर्यचकित करते हुए, गुरु ने उससे कहा, मैं तुम्हें सिखा सकता हूं कि मंत्रों का उपयोग करके कैसे तीर चलाया जाए, जिससे आपको वर्तमान में जो कुछ भी है उससे परे शक्तियों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी, लेकिन मैं आपको सूचित करना चाहता हूं कि आपका प्रशिक्षण सामान्य समय से दोगुना होगा क्योंकि आपको वो सब कुछ भुलाना होगा जो कुछ भी आप अभी जानते हैं। यह सब कुछ उन पाठकों पर लागू हो सकता है, जो लंबे समय से जप कर रहें हैं। यदि आप नई ऊंचाइयों पर पहुंचना चाहते हैं, तो आपको अपने वर्तमान अभ्यास पर प्रश्न उठाने होंगे और आपके वर्तमान प्रयास को बदलने की आवश्यकता हो सकती है।

श्रील प्रभुपाद ने इस बात पर बल दिया कि आत्मनिरीक्षण करना कितना महत्वपूर्ण है, ताकि हम अपनी जप की आदतों को समझ सकें और उनमें सुधार कर सकें। उन्होंने कहा, उन लोगों के लिए जो अपने ह्रदय से धूल साफ करने के इच्छुक नहीं हैं, और जो परिस्थितियों को यथा स्थिति रखना चाहते हैं, हरे कृष्ण महा मंत्र का जप करने के अलौकिक परिणाम को प्राप्त करना संभव नहीं है। इसलिए, उन्हें भगवान् के प्रति अपने सेवा भाव को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें बिना किसी अपराध के जप करने में सहायता मिलेगी (भक्ति रसामृत सिन्धु, अध्याय 12 से)।

जप की बुरी आदतों को सुधारना, जो हमारे अभ्यास में घुलमिल गयीं हैं, भी कृष्ण की एक सेवा है।

हरिनाम प्रभु की जय !!!


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हरे कृष्ण,

उपरोक्त परम पूज्य सचिनंदन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम के अंश का हिंदी में अनुवाद है। इस पुस्तक के विषय में और अधिक जानकारी के लिए कृपया ये लिंक पर जाइये


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