जप प्रेरणा – २१ फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम से अंश
जीवित नाम से मिलना।
आप जीवित कब होते हो? एक संभावित उत्तर यह है कि जब तक आध्यात्मिक ऊर्जा, जीवन शक्ति कार्य कर रही है। जब यह ऊर्जा निकलती है, तो शरीर मृत हो जाता है।
श्री हरि नाम चिंतामणि में, श्रील भक्तिविनोद ठाकुर बताते हैं कि जीवन और मृत्यु की इस दुनिया में, केवल दो आध्यात्मिक अस्तित्व उपस्थित हैं, व्यक्तिगत आत्माएं, और भगवान कृष्ण का पवित्र नाम। जप इन दोनों को एक साथ लाने की कला है। बाकी सब निर्जीव सामग्री है। पवित्र नाम सदैव जीवित है, किंतु आत्मा आध्यात्मिक रूप से तभी जीवित होती है जब वह वास्तव में पवित्र नाम से मिलती है और उस भाव में जप करती है। अन्यथा, आत्मा आग से निकली चिंगारी की तरह है, लगभग मृत।
यांत्रिक जप, जहाँ हम अन्यमनस्क होतें हैं, काम नहीं करेंगा, क्योंकि उससे हम केवल पवित्र नाम की छाया से मिलते हैं, वास्तविक जीवित नाम से नहीं।
जप में एक प्रगतिशील विकास होता है, जहां उच्च और उच्चतर चरणों में जपकर्ता की प्रतीक्षा होती है, प्रत्येक चरण विभिन्न प्रकार की आध्यात्मिक प्रसन्नता प्रदान करता हैं, जैसे जैसे पवित्र नाम अपनी अधिक से अधिक महत्ता और गुण प्रकट करता है। और तब अंत में, सबसे बड़ा रहस्य सामने आएगा कि पवित्र नाम बिल्कुल दैवीय युगल के समान है। कोई अंतर नहीं। एक अर्थ में, यह यात्रा का अंत है, दूसरे में, शुद्ध पवित्र नाम, शुद्ध नाम के साथ दिव्य प्रेम की एक और यात्रा का आरम्भ है।
हरिनाम प्रभु की जय।
=================================================
हरे कृष्ण,
उपरोक्त परम पूज्य सचिनंदन स्वामी महाराज की पुस्तक द लिविंग नेम के अंश का हिंदी में अनुवाद है। इस पुस्तक के विषय में और अधिक जानकारी के लिए कृपया ये लिंक पर जाइये
===============================
इस्कॉन पुणे से जप प्रवचन/पुस्तक अंश के रूप में दैनिक जप प्रेरणा (अंग्रेज़ी और हिंदी भाषा में अनुलेख और अनुवाद के साथ), साझा करने के लिए समूह।
समूह से जुड़ने के लिये इस लिंक को अपने मोबाइल से खोलें:
(यदि आप पहले से किसी भी "हरैर नामैव केवलम् - HNK" समूह से जुडें हैं तो कृपया इस लिंक को क्लिक न करें)
=================================================
HH Shachinandan Swami Maharaj, Hindi Japa Prerana, His Holiness Sachinandan Swami, The Living Name, The Living Name Book,

Comments
Post a Comment