जप प्रेरणा – १० फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य से अंश।
शुद्ध पवित्र नाम, भौतिक जिव्हा का उत्पाद नहीं अपितु एक दिव्य उपहार है (शेष भाग)हम कभी भी स्वयं आध्यात्मिक आयाम पर चढ़कर अपनी इच्छा से भगवान् से नहीं मिल सकते हैं। लेकिन भगवान् दया करके हमारे स्तर तक उतर सकते हैं, और, यदि वे प्रसन्न होते हैं, तो हमें स्वयं को प्रकट करते हैं।
एक उदाहरण हमें समझने में मदद कर सकता है। सदैव जलता हुआ सूरज केवल जब कभी पूर्वी क्षितिज पर दिखाई देता है और प्रकाश देता है तो हम उसे देख सकते हैं। हम सूर्य को केवल उसकी किरणों और गर्मी के माध्यम से देख सकते हैं और मानव निर्मित मोमबत्तियों या रोशनी की मदद से नहीं।
भक्ति एक शाश्वत भाव है जो हमारी इंद्रियों की क्रियाओं द्वारा की गयी किसी भी साधना द्वारा निर्मित नहीं है। यह आत्मा में केवल कृष्ण की आध्यात्मिक ऊर्जाओं, संवित और ह्लादिनी द्वारा प्रकट होती है। उसी प्रकार पवित्र नाम कभी भी इस जगत का उत्पाद नहीं है।
आइए एक और उदाहरण के माध्यम से इस महत्वपूर्ण तथ्य को समझने का प्रयास करते हैं। पुराने समय में, लोगों ने विस्तृत यज्ञ किए, जिनके लिए भव्य तैयारी की आवश्यकता थी। सबसे पहले, ब्राह्मणों को ढूंढना और उनकी आतिथ्य करना पड़ता था। तब उन्हें यज्ञ बेदी का निर्माण करना होता था, अग्नि कुंडों का निर्माण करना होता था, यज्ञ के लिए आवश्यक सभी बर्तनों का अधिग्रहण करना था और प्रसाद इकट्ठा करना होता था। इन सभी तैयारियों के बाद अंततः यज्ञ की परिणति होती थी, यज्ञ का परिणाम क्या होना चाहिए ये किसी भी मनुष्य के प्रभाव से परे होता था। भगवान स्वयं प्रतिभागियों को अपना आशीर्वाद देने के लिए प्रकट होते थे।
श्रीमद्भागवतम् में, हम सुनते हैं कि कैसे भगवान विष्णु ने राजा पृथु के सामने एक ऐसे यज्ञ के समय दर्शन दिए थे। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जब भगवान् प्रकट होते है, तो वह कभी भी अपने पैरों से पृथ्वी को नहीं छूते हैं। दूसरे शब्दों में, वे सदैव मानवों के जगत में दिखाई देने पर भी पारलौकिक रहते हैं। उसी प्रकार, ये स्वयं कृष्ण हैं, जो स्वयं का उच्चारण करवाते हैं या सच्चे भक्त की जिव्हा पर नृत्य करते हैं, जो भक्त के पूरे अस्तित्व को प्रभावित करता है, वे कभी भी जपकर्ता की निर्मिती नहीं हैं। नहीं, वे सदैव के लिए आने और जाने के लिए स्वतंत्र है जैसा वे चाहें।
हरिनाम प्रभु की जय!!!
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हरे कृष्ण,
उपरोक्त परम पूज्य सचिनंदन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य के अंश का हिंदी में अनुवाद है। इस पुस्तक के विषय में और अधिक जानकारी के लिए कृपया ये लिंक पर जाइये
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