जप प्रेरणा – १६ फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य से अंश।
मन को नियंत्रित करने के लिए भक्ति विधि सबसे अधिक प्रभावी है।
पवित्र शास्त्र कई उपाय प्रदान करते हैं जिनके द्वारा हम मन को एकाग्र कर सकते हैं क्योंकि सभी योग परंपराओं में, मानसिक नियंत्रण उन्नति करने की कुंजी है। इन विधियों में से कुछ अनुशासन, नियम, शुद्धि प्रक्रिया, श्वास तकनीक, तर्क, आध्यात्मिक शिक्षा, आदि हैं।तथापि, पवित्र शास्त्र एक ही निष्कर्ष पर आते हैं। जिस प्रकार उगता हुआ सूरज अंधकार के सभी चिह्नों को समाप्त कर देता है, हृदय में भगवान की उपस्थिति के कारण सभी भौतिक इच्छाएं पहले कमजोर पड़ जाती हैं और फिर लुप्त हो जाती हैं। कृष्ण के विषय में सुनकर, या उनके पवित्र नाम को सुनकर, भगवान हृदय में प्रवेश करते हैं, भले ही एक भक्त पूरी तरह से अपनी कृष्ण भावना में स्थापित न हो।
किसी को भी यह जानकर हतोत्साहित नहीं होना चाहिए कि वह अभी भी दिव्य नामों का जप करते समय ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ है, बल्कि जप को जारी रखना चाहिए, और विनम्रतापूर्वक अपनी भौतिक आसक्तियों को स्वीकारते हुए उनसे मुक्त होने की प्रार्थना करनी चाहिए। ऐसा भक्त अनुभव करेगा “ओह, मैं अभी भी बहुत बद्ध हूं। परम पवित्र नामों का जप करने पर भी मेरा मन भटकता है। यह मेरे अतीत और वर्तमान की भौतिक आसक्तियों और भगवान् से लगाव की कमी के कारण है।"
भक्तिविनोद ठाकुर प्रार्थना करते हैं कि मुझे अब सांसारिक संबंधों के लिए जितना लगाव है, मैं प्रार्थना करता हूं कि आपके पवित्र चरणों में उसी स्तर का लगाव विकसित हो सके।
इस स्तर पर, भक्त गहराई में अंदर जाते हैं और अपनी कमियों का चिंतन करने के पश्चात वे सहायता के लिए निष्कपटता से कृष्ण के पास जाते हैं। क्या मैं एक पियक्कड़ के समान नहीं हूँ, जो मद्यपान के भयानक प्रभाव देखने के पश्चात मदिरापान छोड़ना चाहता है? लेकिन अफसोस, जब भी मैं इसके करीब आता हूं और इसे सूंघता हूं, मुझे लगता है कि मैं अभी भी आदी हूं। कैसी दुविधा है! आज मैं असहाय होकर आपकी सन्मुख हुआ हूँ। कृपया मेरी नुकसानदायक भौतिक आसक्तियों को मेरे ह्रदय से निकाल लें और उन्हें आपसे और आपसे जुड़ी हर चीज के लिए गहरे लगाव से परिवर्तित कर दें। जब कृष्ण हमारी निष्कपट मनोदृष्टि, द्वैतवाद और छल से मुक्त दृष्टिकोण को देखते हैं, तो वे निश्चित रूप से शीघ्र ह्रदय में प्रवेश करते हैं और हमारे प्रेम को स्वीकार करते हुए सभी विपरीत इच्छाओं से पूर्णतः मुक्त करते हैं।
भागवतम में वर्णन हैं, श्री कृष्ण, परमभगवान, जो सभी के हृदय में परमात्मा हैं, और एक सच्चे सत्य भक्त के दाता हैं, भक्त के हृदय से भौतिक भोग की इच्छा को साफ करते हैं, जिसने भगवान् के उन संदेशों को सुनने की तीव्र इच्छा विकसित की है, जो अपने आप में गुणी होते हैं, जब ठीक से सुने और जप किये जातें हैं। यह श्लोक पवित्र नामों के जप से भी संबंधित है, पवित्र नाम हमारे हृदयों में प्रवेश करेगा और उन्हें शुद्ध करेगा।
हरिनाम प्रभु की जय!!!
=================================================
हरे कृष्ण,
उपरोक्त परम पूज्य सचिनंदन
स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य के अंश का हिंदी में अनुवाद है। इस पुस्तक के विषय में
और अधिक जानकारी के लिए कृपया ये लिंक पर जाइये
इस्कॉन पुणे से जप
प्रवचन/पुस्तक अंश के रूप में दैनिक जप प्रेरणा (अंग्रेज़ी और हिंदी भाषा में
अनुलेख और अनुवाद के साथ),
साझा करने के लिए समूह।
समूह से जुड़ने के लिये इस
लिंक को अपने मोबाइल से खोलें:
(यदि आप पहले से किसी भी "हरैर
नामैव केवलम् - HNK"
समूह से जुडें हैं तो कृपया इस लिंक को क्लिक न करें)
=================================================
Hindi Japa Prerana, HH Sachinandan Swami, Nama Rahasya, Nama
Rahasya Book, sachinandan swami maharaj, जप चर्चा, हरे कृष्ण जप, हिंदी जप प्रेरणा
Comments
Post a Comment