Skip to main content

जप प्रेरणा – श्री जगदानंद पंडित द्वारा नाम भजन के लिए एक नियमावली (शेष भाग) - ६ फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य से अंश।


जप प्रेरणा – ६ फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य से अंश।

श्री जगदानंद पंडित द्वारा नाम भजन के लिए एक नियमावली (शेष भाग)


यदि चाह प्रणय राखिते गौरंगेर सने, छोटा हरिदास कथा थके येन मने 

यदि आप श्री गौरांग के साथ अपने सम्बन्ध को बनाए रखने की इच्छा रखते हैं, तो निरंतर छोटा हरिदास को याद करते रहें, और यह भी कि क्यों उन्हें स्वयं भगवान के द्वारा इतनी कठोरता से निष्काषित किया गया था।

भला न खाइबे आर भला न परिबे, हृदयेते राधा कृष्ण सर्वदा सेविबे

उत्तम स्वादिष्ट भोजन और महंगे और बढ़िया वश्त्रों का परित्याग करें। सदैव विनम्र बने रहें और अपने हृदय की गहराई में दिव्य दंपत्ति श्री श्री राधा कृष्ण की निरंतर सेवा करें।

बड़ा हरिदासेरा न्याय कृष्ण नाम बोलिबे वदने, अष्ट काल राधा सेविबे कुञ्ज वने

दिन-रात कृष्ण नाम का निरंतर जाप करें, जैसा कि श्रील हरिदास ठाकुर ने किया। अपने हृदय में वृन्दावन की लताओं में होने वाली श्री श्री राधा कृष्ण की अष्ट कालिय लीला सेवा में लीन रहें।

गृहस्थ वैरागी दुहे बोले गौर राय, देखा भाई नाम विना जेना दिन नहीं जाये

श्री गौरांग के निर्देश गृहस्थों के साथ-साथ वैरागी भक्तों के लिए भी हैं। उन्होंने कहा, इस बात का बहुत ध्यान रखें कि कृष्ण नाम का उच्चारण किए बिना एक पल भी न बीते।

बहु अंग साधने भाई नाहीं प्रयोजन, कृष्ण नामाश्राये शुद्ध करहे जीवन

यदि आप शुद्ध भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं तो कई नियम और आध्यात्मिक अभ्यास आवश्यक नहीं हैं। बस कृष्ण नाम के पूर्ण आश्रय की याचना करें और इस प्रकार अपने हृदय और चेतना को शुद्ध करें।

बद्ध जीवे कृपा करी कृष्ण होइल नाम, कलि जीवे दया करी कृष्ण होइला गौर धाम

श्रीकृष्ण, बद्ध जीवों के लिए करुणा के कारण, कृष्ण नाम के रूप में भौतिक जगत में अवतरित होतें हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ समय पहले ही कलयुग के पतित जीवों पर विशेष दया प्रदर्शित करने के लिए श्री कृष्ण श्री चैतन्य महाप्रभु के रूप में गौर धाम नवद्वीप में प्रकट हुए थे।

एकांत सरल भावे भजन गौर जन, तबे तो पिबे भाई श्री कृष्ण चरण

इसलिए मेरे प्यारे भाई, श्री गौरांग के प्रिय पार्षदों की निष्कपटता और निष्ठापूर्वक सेवा करो। यह निश्चित करेगा कि आप श्री कृष्ण के चरण कमलों के आश्रय तक पहुँचें।

गौर जन संगे कर गौरंग बोलिया, हरे कृष्ण नाम बोल नाचिया नाचिया

श्री चैतन्य की उदारता की महिमा और उनके सहयोगियों का महिमामंडन करें। हरे कृष्ण महा मंत्र का जप करें और परमानंद में नृत्य करें।

अचिरे पाइबे भाई नाम प्रेम धन, यहा विलाइते प्रभुर नादिये आगमन  

अति शीघ्र आप सबसे अधिक मूल्यवान वस्तु, नाम प्रेम की कृपा प्राप्त करेंगे, सर्वोच्च भगवान नादिया में इस अमूल्य निधि को स्वतंत्र रूप से वितरित करने के लिए प्रकट हुए।

*हरिनाम प्रभु की जय।*


=================================================
हरे कृष्ण,

उपरोक्त परम पूज्य सचिनंदन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य के अंश का हिंदी में अनुवाद है। इस पुस्तक के विषय में और अधिक जानकारी के लिए कृपया ये लिंक पर जाइये



इस्कॉन पुणे से जप प्रवचन/पुस्तक अंश के रूप में दैनिक जप प्रेरणा (अंग्रेज़ी और हिंदी भाषा में अनुलेख और अनुवाद के साथ), साझा करने के लिए समूह।

समूह से जुड़ने के लिये इस लिंक को अपने मोबाइल से खोलें:
https://chat.whatsapp.com/KuFWEVyKSM3JwaFamsze56

(यदि आप पहले से किसी भी "हरैर नामैव केवलम् - HNK" समूह से जुडें हैं तो कृपया इस लिंक को क्लिक न करें)
=================================================
Hindi Japa Prerana, HH Sachinandan Swami, Nama Rahasya, Nama Rahasya Book, sachinandan swami maharaj, जप चर्चा, हरे कृष्ण जप, हिंदी जप प्रेरणा

Comments

Popular posts from this blog

जप प्रेरणा - कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं - Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can - 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं  Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can जप प्रेरणा – 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - यदि कोई अनन्य भक्ति का अभ्यास करता है, तो वह अपनी स्वयं की योजनाओं से भी अधिक सुख-सुविधा और सेवा पा सकता जब भगवान कृष्ण उसकी देखभाल करते हैं। वास्तव में हम स्वयं का उतना ध्यान नहीं रख सकते हैं जितना कृष्ण हमारा अच्छी तरह से ध्यान रख सकते हैं। जैसे एक बच्चा अपने लिए उतनी अच्छी सेवा नहीं कर सकता, जितनी माँ और पिता उसके लिए कर सकते हैं क्योंकि वे उसके सच्चे कल्याण को जानते हैं। और बच्चा नटखट और उद्दंड हो सकता है। कुछ सुख पाने के नाम पर वह कुछ गन्दी चीज खरीद सकता है और खा सकता है और बीमार हो सकता है। उसी प्रकार हम बद्ध आत्मा होने के कारण ये नहीं जानते कि हमारे लिए क्या अच्छा है लेकिन कृष्ण जानते हैं कि हमारे लिए सबसे उत्तम क्या है। - और एक बार जब आप इस विषय में आश्वस्त हो जाते हैं, तो आप अपना समय कृष्ण की सेवा में लगा सकते हैं, आप अपनी ऊर्जा और धन कृष्ण सेवा में व्यय कर सकते हैं, आप ...

जप प्रेरणा – पवित्र नाम सभी व्याधियों को ठीक करता है - १७ फरवरी २०

जप प्रेरणा – १७ फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य से अंश। पवित्र नाम सभी व्याधियों को ठीक करता है। (श्रील गौर गोविंद स्वामी महाराज का एक लेख) यदि कोई अपने कान खोलता है और गौरांग महाप्रभु की मधुर लीला को प्रवेश करने की अनुमति देता है, तो उसका हृदय सभी भौतिक संदूषणों से मुक्त हो जाएगा। हृदय शुद्ध हो जाएगा। आप हृदय को और कैसे शुद्ध कर सकते हैं? क्या कोई चिकित्सा वैज्ञानिक है जो जानता है कि ऐसा कैसे करना है? चिकित्सा वैज्ञानिक आपके आंत्र को साफ कर सकते हैं, लेकिन वह आपके ह्रदय को साफ नहीं कर सकते हैं। प्रार्थना में नरोत्तम दास ठाकुर पध्यती देते हैं - चैतन्य महाप्रभु की मधुर लीलाएँ सुनें - गौरान्गेर मधुरा-लीला, जार करने प्रवेसिला, ह्रदय निर्मला भेलो तार - तब हृदय निर्मल हो जाता है। निम्नलिखित श्लोकों में, हम सीखते हैं कि जप से न केवल हृदय रोग ठीक होता है, बल्कि शारीरिक रोग भी ठीक होते हैं अच्युतानंद गोविन्द नामोच्चारण भिशितः नश्यन्ति सकला रोगः सत्यम सत्यम वदामी अहम्  (ब्रहन-नारदीय पुराण से) मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि यह सच है। अच्युता, आनंद और...

जप प्रेरणा - श्रद्धा का अर्थ है रुचि, विश्वास और सम्मान - Shraddha Means Interest, Faith and Respect - 24 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

श्रद्धा का अर्थ है रुचि, विश्वास और सम्मान  Shraddha Means Interest, Faith and Respect जप प्रेरणा – 24 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - श्रील प्रभुपाद ने श्रद्धा शब्द का तीन अलग-अलग अर्थों में अनुवाद किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा का अर्थ है रुचि, श्रद्धा का अर्थ है विश्वास, श्रद्धा का अर्थ है सम्मान। - तो यदि किसी को पवित्र नाम पर श्रद्धा है, तो उसे जप में रुचि होगी, उसे पवित्र नामों की शक्ति के प्रति सम्मान होगा। - और यदि किसी को विश्वास या रुचि या सम्मान नहीं है, तो ऐसे लोग भी हैं जो पवित्र नामों की आलोचना करते हैं कि ये शक्तिहीन है, जो कि वास्तव में उनके अपने दोषों के कारण है। अतः वे पवित्र नाम में दोष ढूंढते हैं और चले जाते हैं और दूषित ही रहते हैं। - किन्तु जो पवित्र नाम में विश्वास और सम्मान रखते हैं, उन्हें पवित्र नाम में रुचि होगी, और वे पवित्र नाम को अपने हृदयों में प्रकट होने देंगे और उनके हृदयों में अशुद्धियों को शुद्ध करेंगे। हरिनाम प्रभु की जय !!! ================================================= हरे कृष्ण , इस्कॉन पुण...