Skip to main content

जप प्रेरणा – भगवान् के साथ अपने सम्बन्ध को समझते हुए जप करें - ५ फरवरी २० - श्रीमान राधेश्याम प्रभु द्वारा जप प्रवचन


हिंदी अनुलेख 

जप प्रेरणा – ५ फरवरी २० - श्रीमान राधेश्याम प्रभु द्वारा जप प्रवचन


हम एक भौतिक जगत में रह रहे हैं जहां हम छुपे हुए संबंधों से निराश हैं। छुपे हुए संबंधों का अर्थ है कि जीव भौतिक शरीर का मुखौटा पहने हुए है और सभी जीव भौतिक शरीरों के अपने मुखौटे पहने हुए हैं। इस कारण से, इस सम्बन्ध में एक व्यक्ति और दूसरे व्यक्ति के बीच का आदान-प्रदान धोखा देने के डर से घिरा रहता है। और सम्बन्ध बनाने के लिए स्वार्थी प्रेरणाएं भी हैं। और ये सम्बन्ध स्वयं को एक पुरुष या महिला के रूप में शरीर समझने के भ्रम पर आधारित होते हैं। और भय और भौतिक प्रेरणाएं वाले इस जगत के छुपे हुए रिश्ते न तो स्वयं को संतुष्ट करते हैं, और न ही दूसरों को संतुष्ट करने में सक्षम हैं। इसलिए, यह जगत न्यूनाधिक एक रंग मंच की तरह है जहाँ हर कोई अपनी भूमिका निभा रहा है। किंतु जीव और कृष्ण के बीच वास्तविक, संयुक्त, सच्चे सम्बन्ध होतें हैं।

भक्तिविनोद ठाकुर ने अपने एक लेख में कहा है कि जब कोई भगवान के पवित्र नाम को पुकार रहा है, तो सबसे पहले प्रभु के साथ एक सम्बन्ध स्थापित करना चाहिए। सम्बन्ध, बन्ध का अर्थ है जुड़ा हुआ, जैसे एक माँ और बच्चे का सम्बन्ध है वे बहुत दृढ़ता से जुड़े हुए होतें हैं। हिंदी में शाब्दिक अर्थ है एक साथ बंधना। जैसे पति-पत्नी एक रिश्ते में एक साथ बंधे होते हैं। ऐसा नहीं है कि वे केवल एक घर में रहते हैं। वे वास्तव में पवित्र रिश्ते द्वारा, सामाजिक रिश्ते से बंधे हुए हैं, जो माता-पिता और बाकी सब, और भगवान के आशीर्वाद द्वारा व्यवस्थित किया जाता है। कृष्ण के साथ संबंध का अर्थ है कि व्यक्ति को कृष्ण के साथ ढृढ़ता से बंधे रहना चाहिए, जिससे वह भक्ति को त्याग न सके। उन्होंने कहा कि इस तरह के ढृढ़ संबंध को अनुभव करना चाहिए। सामान्यतः, जब हम संबंध की बात करते हैं तो हम भयभीत हो जाते हैं कि मुझे सहजिया नहीं बनना है, कि स्वयं को कृष्ण का प्रेमी होने की कल्पना करना और इस तरह की और बातें। इसलिए, भक्तिविनोद ठाकुर, सिद्ध देह और साधना देह में संबंधों को स्पष्ट रूप से अलग से स्पष्ट करते हैं। वे कहते हैं कि सिद्ध देह में पाँच प्रकार के संबंध हैं, शांत, दास्य, साख्य, वात्सल्य, माधुर्य लेकिन साधना देह में, जो हम सभी के लिए है कि हमारा सम्बन्ध कृष्ण का एक अंश होने का अनुभव होना चाहिए, कृष्ण का एक दास होने का सम्बन्ध “जीवेर स्वरूप होए कृष्णेर नित्य दास”। यह स्वयं भगवान चैतन्य ने सिखाया है।

अयि नन्दतनुज किंकरं पतितं मां विषमे भवाम्बुधौ।
कृपया तव पादपंकज-स्थितधूलिसदृशं विचिन्तय॥५॥

तो भगवान चैतन्य कहते हैं, मेरे प्यारे भगवान, मैं आपका हूँ, किसी न किसी तरह मैं जन्म और मृत्यु के इस सागर में गिर गया हूँ, कृपया मुझे उठाओ और मुझे अपने चरण कमलों के लाखों धूलिकणों में से एक के रूप में स्थान दो। यही बात प्रह्लाद महाराज अपने मित्रों से कहते हैं "यथा हि पुरुषस्येह विष्णो: पादोपसर्पणम्"। उस श्लोक में वे तीन शब्द प्रिय, आत्मेश्वर और सुहृद कहते हैं। जीव के लिए भगवान बहुत प्रिय हैं। और भगवान आत्मेश्वर हैं अर्थात वे जीव के स्वामी हैं। और सुहृद का अर्थ है, वे सर्वोच्च शुभचिंतक है। इसलिए, इन तीन बातों को याद करते हुए, हम अपने सम्बन्ध भगवान् के साथ बना सकते हैं और भगवान् के साथ जुड़ सकते हैं, और इस संबंध की भावना के साथ जब हम जप करते हैं तो वह वास्तविक संबंध है, बाकी सब छुपे हुए संबंध हैं।

भगवद गीता में भी भगवान कृष्ण कहते हैं "सुहृदं सर्वभूतानां", मैं जीव का ह्रदय से मित्र हूँ। मैं जीव के हृदय में ठीक उसकी बगल में खड़ा हूं। और मैं ज्ञान, स्मरण और विस्मृति दे रहा हूं, और जो लोग निष्कपटता से भक्ति कर रहे हैं, मैं उन्हें बुद्धि प्रदान करता हूं जिसके द्वारा वे मेरे पास वापस आ सकते हैं।

तो, भक्तिविनोद ठाकुर कहते हैं, यदि कोई भगवान के साथ इस सम्बन्ध का पुन: संयोजन करता है और उस भाव में पवित्र नाम का जप करता है, स्वयं को कृष्ण की संपत्ति मानता है, कि मैं कृष्ण से सम्बंधित हूं, मैं कृष्ण का दास हूं, कृष्ण मेरे स्वामी हैं। तब पवित्र नाम का जप वांछित प्रभाव को अत्यधिक तीव्रता से उत्पन्न करेगा। दूसरी ओर, इस जगत में छुपे हुए रिश्ते बहुत ही सतही, असंतोषजनक और निराशाजनक हैं। तो इन दोनों की तुलना करनी होगी और भक्ति करते समय कृष्ण के साथ अपने अटूट संबंध को सदैव याद रखना होगा।

हरिनाम प्रभु की जय!!!

=================================================
हरे कृष्ण,


इस्कॉन पुणे से जप प्रवचन/पुस्तक अंश के रूप में दैनिक जप प्रेरणा (अंग्रेज़ी और हिंदी भाषा में अनुलेख और अनुवाद के साथ), साझा करने के लिए समूह।


समूह से जुड़ने के लिये इस लिंक को अपने मोबाइल से खोलें:
https://chat.whatsapp.com/KuFWEVyKSM3JwaFamsze56

(यदि आप पहले से किसी भी "हरैर नामैव केवलम् - HNK" समूह से जुडें हैं तो कृपया इस लिंक को क्लिक न करें)
=================================================
Hindi Japa Prerana, HG Radheshyam Prabhu, Japa Talk, Japa Talk in Hindi, Radheshyam Prabhu, जप चर्चा, हरे कृष्ण जप, हिंदी जप प्रेरणा, जप टॉक

Comments

Popular posts from this blog

जप प्रेरणा - कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं - Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can - 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

कृष्ण हमारी देखभाल हमसे भी अच्छी प्रकार से करते हैं  Krishna Takes Care of Us Better than We Ourselves Can जप प्रेरणा – 1 Jun 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - यदि कोई अनन्य भक्ति का अभ्यास करता है, तो वह अपनी स्वयं की योजनाओं से भी अधिक सुख-सुविधा और सेवा पा सकता जब भगवान कृष्ण उसकी देखभाल करते हैं। वास्तव में हम स्वयं का उतना ध्यान नहीं रख सकते हैं जितना कृष्ण हमारा अच्छी तरह से ध्यान रख सकते हैं। जैसे एक बच्चा अपने लिए उतनी अच्छी सेवा नहीं कर सकता, जितनी माँ और पिता उसके लिए कर सकते हैं क्योंकि वे उसके सच्चे कल्याण को जानते हैं। और बच्चा नटखट और उद्दंड हो सकता है। कुछ सुख पाने के नाम पर वह कुछ गन्दी चीज खरीद सकता है और खा सकता है और बीमार हो सकता है। उसी प्रकार हम बद्ध आत्मा होने के कारण ये नहीं जानते कि हमारे लिए क्या अच्छा है लेकिन कृष्ण जानते हैं कि हमारे लिए सबसे उत्तम क्या है। - और एक बार जब आप इस विषय में आश्वस्त हो जाते हैं, तो आप अपना समय कृष्ण की सेवा में लगा सकते हैं, आप अपनी ऊर्जा और धन कृष्ण सेवा में व्यय कर सकते हैं, आप ...

जप प्रेरणा – पवित्र नाम सभी व्याधियों को ठीक करता है - १७ फरवरी २०

जप प्रेरणा – १७ फरवरी २० - परम पूज्य शचीनन्दन स्वामी महाराज की पुस्तक नाम रहस्य से अंश। पवित्र नाम सभी व्याधियों को ठीक करता है। (श्रील गौर गोविंद स्वामी महाराज का एक लेख) यदि कोई अपने कान खोलता है और गौरांग महाप्रभु की मधुर लीला को प्रवेश करने की अनुमति देता है, तो उसका हृदय सभी भौतिक संदूषणों से मुक्त हो जाएगा। हृदय शुद्ध हो जाएगा। आप हृदय को और कैसे शुद्ध कर सकते हैं? क्या कोई चिकित्सा वैज्ञानिक है जो जानता है कि ऐसा कैसे करना है? चिकित्सा वैज्ञानिक आपके आंत्र को साफ कर सकते हैं, लेकिन वह आपके ह्रदय को साफ नहीं कर सकते हैं। प्रार्थना में नरोत्तम दास ठाकुर पध्यती देते हैं - चैतन्य महाप्रभु की मधुर लीलाएँ सुनें - गौरान्गेर मधुरा-लीला, जार करने प्रवेसिला, ह्रदय निर्मला भेलो तार - तब हृदय निर्मल हो जाता है। निम्नलिखित श्लोकों में, हम सीखते हैं कि जप से न केवल हृदय रोग ठीक होता है, बल्कि शारीरिक रोग भी ठीक होते हैं अच्युतानंद गोविन्द नामोच्चारण भिशितः नश्यन्ति सकला रोगः सत्यम सत्यम वदामी अहम्  (ब्रहन-नारदीय पुराण से) मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि यह सच है। अच्युता, आनंद और...

जप प्रेरणा - श्रद्धा का अर्थ है रुचि, विश्वास और सम्मान - Shraddha Means Interest, Faith and Respect - 24 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu

श्रद्धा का अर्थ है रुचि, विश्वास और सम्मान  Shraddha Means Interest, Faith and Respect जप प्रेरणा – 24 May 20 – Hindi Translation of Summary of Japa Talk by His Grace Radheshyam Prabhu - श्रील प्रभुपाद ने श्रद्धा शब्द का तीन अलग-अलग अर्थों में अनुवाद किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा का अर्थ है रुचि, श्रद्धा का अर्थ है विश्वास, श्रद्धा का अर्थ है सम्मान। - तो यदि किसी को पवित्र नाम पर श्रद्धा है, तो उसे जप में रुचि होगी, उसे पवित्र नामों की शक्ति के प्रति सम्मान होगा। - और यदि किसी को विश्वास या रुचि या सम्मान नहीं है, तो ऐसे लोग भी हैं जो पवित्र नामों की आलोचना करते हैं कि ये शक्तिहीन है, जो कि वास्तव में उनके अपने दोषों के कारण है। अतः वे पवित्र नाम में दोष ढूंढते हैं और चले जाते हैं और दूषित ही रहते हैं। - किन्तु जो पवित्र नाम में विश्वास और सम्मान रखते हैं, उन्हें पवित्र नाम में रुचि होगी, और वे पवित्र नाम को अपने हृदयों में प्रकट होने देंगे और उनके हृदयों में अशुद्धियों को शुद्ध करेंगे। हरिनाम प्रभु की जय !!! ================================================= हरे कृष्ण , इस्कॉन पुण...